18 दिन में तबाह ईरान की ताकत, खामेनेई से लारिजानी तक; एक-एक कर ढेर हुए टॉप नेता और कमांडर!

ईरान ने 18 दिनों की जंग में अपने कई शीर्ष नेताओं और सैन्य कमांडरों को खो दिया, जिनमें अली खामेनेई भी शामिल हैं, जिससे देश को बड़ा झटका लगा है.

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मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष ने ईरान को गहरे जख्म दिए हैं. महज 18 दिनों के अंदर ही, देश ने अपने कई प्रमुख नेताओं और सैन्य अधिकारियों को खो दिया है. सबसे बड़ा झटका संघर्ष के पहले ही दिन लगा, जब अली खामेनेई की मौत हो गई. इसके बाद, लगातार हमलों की एक कड़ी में शीर्ष कमांडरों के मारे जाने से ईरान की रणनीतिक ताकत को काफी नुकसान पहुंचा है. इन झटकों के बावजूद, ईरान ने जवाबी हमलों के जरिए अपने इरादे साफ कर दिए हैं.

पहले ही दिन एक बड़ा झटका

28 फरवरी को हुए हमलों में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत ने पूरे देश को अंदर तक हिलाकर रख दिया. सर्वोच्च नेता के करीबी सलाहकार अली शमखानी भी उनके साथ ही मारे गए. इस हमले में मोहम्मद पाकपुर, अज़ीज़ नासिरज़ादेह और अब्दुलरहीम मूसावी की भी जान चली गई. एक ही हमले में इतने सारे उच्च-रैंकिंग नेताओं को खोना ईरान के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हुआ.

हमलों के बीच बढ़ते नुकसान

शुरुआती हमले के बाद भी, हमलों में कोई कमी नहीं आई. जहां एक तरफ ईरान ने अलग-अलग जगहों पर जवाबी हमले किए. वहीं दूसरी तरफ इस दौरान उसके कई अहम अधिकारियों को लगातार निशाना बनाया जाता रहा. इन लगातार हमलों ने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सैन्य और राजनीतिक, दोनों तरह के नेतृत्व का अचानक खत्म हो जाना स्थिति को और भी ज़्यादा पेचीदा बना गया है.

17 मार्च को एक और बड़ा झटका

17 मार्च को एक और बड़ा हमला हुआ, जिसमें अली लारीजानी की मौत हो गई. उनके बेटे भी उनके साथ ही मारे गए. उसी दिन, गुलामरेजा सुलेमानी की भी जान चली गई. इसके बाद, खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब के मारे जाने की भी खबरें सामने आईं. इन घटनाओं ने ईरान को और भी ज्यादा कमजोर कर दिया है.

लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की तैयारी

लगातार हो रहे नुकसान के बावजूद, ईरान पीछे हटने के मूड में नहीं है. माना जा रहा है कि देश इस संघर्ष को लंबे समय तक खींचने की रणनीति पर काम कर रहा है. ईरान का मानना ​​है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों को लंबे समय तक उलझाए रखकर वह उन पर काफी दबाव डाल सकता है. इस बीच, मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और ऐसा नहीं लगता कि स्थिति जल्द ही सामान्य हो पाएगी.

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