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अमेरिकी नौसेना का हाईटेक कमाल! Sea Drone ने समुद्र से निकाले फंसे जवान, इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास हेलीकॉप्टर हादसे के बाद अमेरिकी नौसेना ने पहली बार Sea Drone की मदद से फंसे पायलट्स को सुरक्षित बचाया.

Calendar Last Updated : 10 June 2026, 08:57 AM IST
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नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट के समुद्री इलाके में अमेरिकी नौसेना ने एक अनोखा रेस्क्यू ऑपरेशन अंजाम दिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया था. इसके बाद अमेरिकी सेना ने पहली बार एक मानव रहित समुद्री ड्रोन की मदद से हेलीकॉप्टर क्रू के दो सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला.

इस ऑपरेशन के लिए अमेरिकी नौसेना ने ‘सैरोनिक कॉर्सियर’ नाम के एडवांस समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल किया. यह लगभग 24 फीट लंबा ऑटोनॉमस समुद्री जहाज है, जो बिना किसी इंसानी चालक के काम करता है.

पहली बार हुआ ऐसा इस्तेमाल

अमेरिकी सेना के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी मानव रहित समुद्री जहाज को सीधे रेस्क्यू मिशन में इस्तेमाल किया गया. अब तक ऐसे ड्रोन मुख्य रूप से निगरानी, जासूसी और समुद्री सुरक्षा के लिए उपयोग किए जाते थे. अमेरिकी रक्षा विभाग लंबे समय से ड्रोन तकनीक को बढ़ावा दे रहा है ताकि सैनिकों के जोखिम को कम किया जा सके और तेजी से कार्रवाई की जा सके.

‘टास्क फोर्स 59’ संभाल रही जिम्मेदारी

अमेरिकी नौसेना ने साल 2021 में ‘टास्क फोर्स 59’ नाम की विशेष यूनिट बनाई थी. इसका मुख्यालय बहरीन में स्थित है. यह यूनिट पूरी तरह मानव रहित सिस्टम और एडवांस ड्रोन तकनीक पर काम करती है. मार्च के अंतिम दिनों में इसी यूनिट ने मिडिल ईस्ट के समुद्री इलाके में कॉर्सियर ड्रोन की तैनाती शुरू की थी.

जासूसी से लेकर युद्ध तक बढ़ रहा इस्तेमाल

इन समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, समुद्री सुरंगों का पता लगाने और निगरानी मिशन में किया जाता है. अब इन्हें युद्ध के लिए भी तैयार किया जा रहा है. पेंटागन का मानना है कि कम लागत वाले ये ड्रोन भविष्य में सैन्य रणनीति का बड़ा हिस्सा बन सकते हैं. अमेरिका आने वाले समय में सैकड़ों से लेकर हजारों समुद्री ड्रोन तैनात करने की योजना बना रहा है.

यूक्रेन युद्ध में भी दिखी ताकत

समुद्री ड्रोन की ताकत दुनिया यूक्रेन-रूस युद्ध में भी देख चुकी है. यूक्रेन ने समुद्री ड्रोन की मदद से रूस के कई युद्धपोतों को नुकसान पहुंचाया था. इससे साफ हो गया कि भविष्य की लड़ाइयों में मानव रहित तकनीक की भूमिका बेहद अहम होने वाली है.

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