Courtesy: Pinterest
नई दिल्ली: भारत में मौजूदा समय में चैत्र नवरात्रि मनाई जा रही है, जिसमें देवी दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की पूजा के लिए समर्पित है. नौ दिनों तक चलने वाले इस त्यौहार का प्रत्येक दिन विशेष और अलग महत्व रखता है. आज नवरात्रि का तीसरा दिन है जिसमें भक्त देवी दुर्गा के तीसरे रूप, मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं, जोकि अपनी शक्ति, साहस और रक्षा करने वाले स्वभाव के लिए जानी जाती हैं.
मां चंद्रघंटा देवी दुर्गा का तीसरा अवतार हैं. उनका नाम 'चंद्र' (चंद्रमा) और 'घंटा' (घंटी) से मिलकर बना है, जो उनके माथे पर घंटी के आकार के अर्धचंद्र को दर्शाता है. उन्हें अक्सर बाघ या शेर पर सवार दिखाया जाता है और उनके दस हाथों में अलग-अलग हथियार होते हैं.
उनका रूप वीरता और रक्षा का प्रतीक माना जाता है, और उनकी पूजा करने से जीवन में शांति, साहस और सकारात्मकता आती है.
पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि 2026 के तीसरे दिन पुजा का शुभ मुहूर्त प्रातःकाल 04:30 बजे से 05:15 बजे तक तक है. उसके बाद सुबह 06:15 बजे से 08:30 बजे, फिर दोपहर के 12:05 बजे से 12:55 बजे और शाम 06:32 बजे से शाम 06:55 बजे तक है.
20 मार्च 2026 (शुक्रवार) यानी तीसरे दिन का रंग ग्रे है. ग्रे कलर शांति, संतुलन और इमोशनल स्टेबिलिटी का प्रतीक है, जो भक्तों को शांत और स्थिर रहने में मदद करता है.
मां चंद्रघंटा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है. वह एक योद्धा देवी हैं जो अपने भक्तों को बुरी शक्तियों से बचाती हैं. उनका शक्तिशाली रूप साहस और आत्मविश्वास को प्रेरित करता है.
उनकी पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मकता दूर होती है. साथ ही मां की पूजा करने से भक्तों का आध्यात्मिक विकास भी होता है.
पूजा स्थल को साफ करें और वहां मां चंद्रघंटा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.
एक दीया और अगरबत्ती जलाएं.
फूल, फल, मिठाई और पानी अर्पित करें.
मूर्ति के नीचे लाल कपड़ा बिछाएं और उसे ताजे फूलों से सजाएं.
श्रद्धापूर्वक मंत्रों का जाप करें और आरती करें.
जपने योग्य मंत्र
ॐ चंद्रायन नमः
ॐ चंद्रघंटायै नमः
भक्त शक्ति और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इन मंत्रों का 108 बार या अपनी सुविधानुसार जाप कर सकते हैं.