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Parama Ekadashi 2026: कब करें पूजा, कब खोलें व्रत? जानिए शुभ मुहूर्त, पारण समय और धार्मिक महत्व

आज अधिकमास की दुर्लभ परमा एकादशी मनाई जा रही है, जिसे भगवान विष्णु की कृपा और विशेष पुण्य प्राप्ति के लिए बेहद शुभ माना जाता है. श्रद्धालु 12 जून को सुबह 5:23 बजे से 8:10 बजे तक व्रत का पारण कर सकते हैं.

Calendar Last Updated : 11 June 2026, 11:04 AM IST
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नई दिल्ली: अधिकमास में आने वाली परमा एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. आज श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और व्रत रखकर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करने से जीवन की कई परेशानियां दूर होती हैं और भगवान नारायण की कृपा प्राप्त होती है.

कब शुरू हुई परमा एकादशी तिथि?

परमा एकादशी की तिथि 11 जून को रात्रि 12 बजकर 57 मिनट से शुरू हो चुकी है. यह तिथि आज रात 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगी. इसी दौरान व्रत और पूजा का विशेष महत्व माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास में आने वाली यह एकादशी सामान्य एकादशियों की तुलना में अधिक फलदायी मानी जाती है.

पारण का शुभ समय

परमा एकादशी व्रत का पारण 12 जून को किया जाएगा. व्रती सुबह 5 बजकर 23 मिनट से 8 बजकर 10 मिनट के बीच व्रत खोल सकते हैं. पारण के समय भगवान विष्णु का स्मरण करने और जरूरतमंदों को दान देने का भी विशेष महत्व बताया गया है.

कैसे करें भगवान विष्णु की पूजा?

व्रत के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें. पूजा के दौरान "ॐ नमो नारायणाय" और "विष्णवे नमः" मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है. इसके साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम, भगवद्गीता या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी किया जा सकता है. व्रत रखने वाले लोग अनाज का सेवन नहीं करते हैं. अधिकतर श्रद्धालु फल, दूध और हल्के आहार पर रहते हैं, जबकि कुछ लोग निर्जल व्रत भी रखते हैं.

व्रत के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

परमा एकादशी के दिन मन को शांत रखना चाहिए और क्रोध, विवाद तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए. दिनभर भगवान की भक्ति, जप और ध्यान में समय बिताना शुभ माना जाता है. साथ ही दान-पुण्य करने से व्रत का फल और अधिक बढ़ जाता है.

परमा एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परमा एकादशी का व्रत करने से दरिद्रता दूर होती है, धन संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है. यह व्रत संतान सुख, यश और सफलता की प्राप्ति में भी सहायक माना जाता है. भगवान विष्णु की कृपा पाने और विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए यह दिन बेहद शुभ माना जाता है.

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