menu-icon
The Bharatvarsh News

ट्रंप के एक ऐलान से हिला ऑयल मार्केट, कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट, पेट्रोल-डीजल भी हो सकता है सस्ता

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए राहत की उम्मीदें बढ़ा दी हैं.

Calendar Last Updated : 15 June 2026, 02:58 PM IST
Share:

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों की नजर जिस खबर पर टिकी हुई थी, वह आखिरकार सामने आ गई है. अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट ने उम्मीद जगा दी है कि आने वाले दिनों में आम लोगों को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में राहत मिल सकती है.

रविवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई. ब्रेंट क्रूड करीब 3.9 प्रतिशत फिसलकर 84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि अमेरिकी क्रूड ऑयल लगभग 4.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया. विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सहमति और क्षेत्र में तनाव कम होने की संभावना का सीधा असर है. पिछले कुछ महीनों से निवेशकों को डर था कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे कीमतें तेजी से बढ़ जाएंगी.

ट्रंप के बयान ने बदला बाजार का माहौल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर दावा किया कि ईरान के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता पूरा हो चुका है. उन्होंने कहा कि इसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के फिर से खोला जाएगा और अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाई गई नाकेबंदी भी समाप्त कर दी जाएगी. ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक बाजारों में सकारात्मक संदेश दिया. निवेशकों ने इसे क्षेत्र में स्थिरता लौटने का संकेत माना, जिसके बाद तेल की कीमतों पर दबाव कम हो गया.

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है. खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है. फरवरी के अंत में शुरू हुए क्षेत्रीय तनाव के बाद इस मार्ग पर कई तरह की बाधाएं उत्पन्न हो गई थीं. रिपोर्टों के अनुसार, कई व्यापारिक जहाजों को इस मार्ग से गुजरने के लिए भारी शुल्क देना पड़ रहा था, जिससे परिवहन लागत बढ़ गई थी. इसी कारण पूरी दुनिया की निगाहें इस क्षेत्र पर टिकी हुई थीं. यदि यह मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहता, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता था.

तेल की कीमतों को लेकर जताई गई थीं चिंताएं

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाएं बनी रहीं, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती हैं. इसका असर सीधे पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता. कई देशों में महंगाई बढ़ने का खतरा भी बताया जा रहा था. ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते की संभावना को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माना जा रहा है.

19 जून को हो सकते हैं औपचारिक हस्ताक्षर

रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के बीच बनी सहमति को औपचारिक रूप देने की तैयारी चल रही है. बताया जा रहा है कि 19 जून को स्विट्जरलैंड में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं. इस पूरे घटनाक्रम में कई देशों ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी दावा किया है कि दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद सहमति बनी है. उनके अनुसार, समझौते के तहत विभिन्न क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियों को रोकने और शांति बहाल करने पर सहमति बनी है.

सम्बंधित खबर

Recent News