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पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें जारी, घर से निकलने से पहले चेक करें आपके शहर का रेट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को तेज गिरावट देखने को मिली है. क्रूड की कीमतों में भी 5.23 प्रतिशत की बड़ी सेंध लगी है, जिससे इसके भाव गिरकर 84.64 डॉलर प्रति बैरल पर आ पहुंचे हैं.

Calendar Last Updated : 27 July 2026, 01:05 PM IST
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नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को तेज गिरावट देखने को मिली है. इन्वेस्टिंग डॉट कॉम के आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मानक माना जाने वाला 'ब्रेंट क्रूड' वायदा बाजार में 5 प्रतिशत से अधिक टूटकर 87.60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है. इस तेज गिरावट के बाद यह 90 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से काफी नीचे फिसल गया है. क्रूड की कीमतों में भी 5.23 प्रतिशत की बड़ी सेंध लगी है, जिससे इसके भाव गिरकर 84.64 डॉलर प्रति बैरल पर आ पहुंचे हैं.

क्यों आई क्रूड ऑयल में इतनी बड़ी गिरावट?

बीते हफ्ते मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के चलते स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई थी. लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के जरिए होने वाला सऊदी अरब का प्रमुख तेल निर्यात मार्ग प्रभावित हुआ था, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई थीं. 

प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के रेट

फिलहाल देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल पुरानी स्थिर दरों पर ही बिक रहे हैं. दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है। मुंबई में पेट्रोल 111.12 रुपये और डीजल 97.78 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध है. कोलकाता में पेट्रोल 113.43 रुपये और डीजल 99.78 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है. चेन्नई में यही भाव पेट्रोल के लिए 107.75 रुपये और डीजल के लिए 99.57 रुपये प्रति लीटर दर्ज किए गए हैं. वहीं दक्षिण भारत के अन्य प्रमुख केंद्रों बेंगलुरु में पेट्रोल 110.93 रुपये व डीजल 98.79 रुपये और हैदराबाद में पेट्रोल 115.69 रुपये व डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर स्थिर हैं.

भारतीय बाजार और उपभोक्ताओं पर असर

ग्लोबल मार्केट में आई इस बड़ी गिरावट से फिलहाल भारतीय उपभोक्ताओं की जेब को तुरंत राहत नहीं मिली है. भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के पास वर्तमान में उपलब्ध कच्चे तेल का स्टॉक पुरानी दरों या पूर्व निर्धारित आयतों से संबंधित है. भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का 85% से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट आना देश की अर्थव्यवस्था, चालू खाता घाटे और महंगाई दर को नियंत्रित करने के लिहाज से काफी सकारात्मक माना जाता है. यदि वैश्विक स्तर पर क्रूड की कीमतें लंबे समय तक इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दामों में कटौती संभव है

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