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भोलेनाथ के भक्तों के लिए बड़ी खबर! 30 जुलाई से कांवड़ यात्रा, जानें जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त

भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए सबसे शुभ और पवित्र मानी जाने वाली कांवड़ यात्रा जल्द ही शुरू होने जा रही है. धार्मिक दृष्टिकोण से इस अनुष्ठान को अत्यंत फलदायी और अक्षय पुण्य देने वाला माना गया है. यात्रा के दौरान हर तरफ 'बम बम भोले' और 'हर हर महादेव' के जयकारे गूंजने लगते हैं.

Calendar Last Updated : 27 July 2026, 02:36 PM IST
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नई दिल्ली: सावन के पावन महीने की आहट के साथ ही संपूर्ण उत्तर भारत में भक्ति, उल्लास और केसरिया रंग का एक अनूठा संगम देखने को मिलने लगता है. भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए सबसे शुभ और पवित्र मानी जाने वाली कांवड़ यात्रा जल्द ही शुरू होने जा रही है. धार्मिक दृष्टिकोण से इस अनुष्ठान को अत्यंत फलदायी और अक्षय पुण्य देने वाला माना गया है. 'जल यात्रा' के नाम से भी विख्यात इस यात्रा के दौरान हर तरफ 'बम बम भोले' और 'हर हर महादेव' के जयकारे गूंजने लगते हैं.

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शुरुआत और जलाभिषेक की तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार, पावन सावन (श्रावण) मास की शुरुआत के साथ ही इस भव्य कांवड़ यात्रा का औपचारिक आगाज हो जाता है. वर्ष 2026 में कांवड़ यात्रा का शुभारंभ 30 जुलाई गुरुवार, सावन का पहला दिन से हो रहा है, जो कुल 13 दिनों तक चलेगी. इस पावन अवसर पर 30 जुलाई से ही श्रद्धालु हरिद्वार, ऋषिकेश, गोमुख और अन्य पवित्र नदियों के तटों से गंगाजल भरना शुरू कर देंगे. यात्रा का मुख्य ध्येय 11 अगस्त 2026 (मंगलवार) को सावन शिवरात्रि के पावन अवसर पर अपने स्थानीय शिव मंदिरों में भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से जलाभिषेक करना है, जिसके साथ ही भक्त अपना अनुष्ठान और व्रत पूर्ण करेंगे.

क्यों शुरू हुई जल चढ़ाने की परंपरा?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब घातक 'कालकूट विष' निकला, तो सृष्टि को विनाश से बचाने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया. विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया जिससे वे नीलकंठ कहलाए और उनके शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ गया. शिव जी के शरीर की जलन को शांत करने के लिए देवताओं और अनन्य शिवभक्त रावण ने पवित्र गंगा नदी का जल लाकर भोलेनाथ का अभिषेक किया था. शीतल जल से भगवान शिव को राहत मिली. तभी से हर साल सावन के महीने में गंगाजल से शिवजी का जलाभिषेक करने और कांवड़ यात्रा निकालने की पावन परंपरा चली आ रही है.

3 से 11 अगस्त की अवधि क्यों है बेहद खास?

3 अगस्त से 11 अगस्त के बीच की समय-सीमा इस पूरी यात्रा का सबसे मुख्य और महत्वपूर्ण चरण होगी. ऐसा इसलिए है क्योंकि 3 अगस्त को सावन का पहला सोमवार पड़ रहा है और 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि है. इस 9 दिनों की विशेष अवधि में हरिद्वार और अन्य धामों से गंगाजल लेकर लौटने वाले कांवड़ियों की संख्या सड़कों पर सबसे ज्यादा देखने को मिलेगी. सभी श्रद्धालु तेजी से अपने गंतव्य की ओर बढ़ेंगे, जिसके कारण प्रमुख मार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों और स्थानीय शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ेगी.

ट्रैफिक डायवर्जन और आमजन के लिए सलाह

लाखों की संख्या में पैदल चल रहे श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सहूलियत के लिए प्रशासन द्वारा कई प्रमुख हाईवे और रास्तों को बंद किया जाता है. जगह-जगह रूट डायवर्जन लागू रहने के कारण आम यात्रियों को भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ सकता है. यदि आप भी इस दौरान यात्रा करने वाले हैं, तो स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी ट्रैफिक एडवाइजरी देखकर ही अपने सफर की योजना बनाएं.

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