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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को एक महत्वपूर्ण स्टेटस रिपोर्ट सौंपी है. इसमें बताया गया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान अब तक 217 भारतीय नागरिक रूसी सेना में शामिल हो चुके हैं. इनमें से दुर्भाग्यवश 49 भारतीयों की मौत हो गई है. सरकार लगातार इन मामलों पर नजर रखे हुए है और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता मुहैया करा रही है.
सरकार के अनुसार, लगातार कूटनीतिक प्रयासों से 139 भारतीयों को रूसी सेना के अनुबंध से मुक्त कराकर भारत वापस लाया गया है. भारतीय दूतावास रूसी अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए है.
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में केंद्र ने बताया कि अभी भी छह भारतीय लापता हैं. वहीं 23 अन्य भारतीयों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है. मास्को में भारतीय दूतावास इन सभी के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है.
यह जानकारी उस जनहित याचिका के मामले में दी गई है जिसमें आरोप लगाया गया था कि नौकरी के बहाने 26 भारतीयों को रूस ले जाकर जबरन सेना में भर्ती कर लिया गया. याचिकाकर्ताओं ने सरकार से इन लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की मांग की थी.
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को सरकार की रिपोर्ट दी.
याचिका में उल्लिखित 26 भारतीयों में से 14 की मौत हो चुकी है. 11 को “मिसिंग इन एक्शन” बताया गया है. एक भारतीय पर छेड़छाड़ का आरोप है और उसे आठ साल की सजा सुनाई गई है. सरकार ने लापता लोगों की पहचान और शवों की पुष्टि के लिए 21 परिवारों के डीएनए सैंपल रूस भेजे हैं. प्रभावित परिवारों को नियमित रूप से अपडेट दिया जा रहा है.
सरकार की रिपोर्ट में कहा गया है कि कई भारतीय अच्छे वेतन, साइनिंग बोनस और रूसी नागरिकता के वादे से प्रभावित होकर रूसी सेना में शामिल हुए. भर्ती के समय करीब 5,000 डॉलर साइनिंग बोनस, 2,500 डॉलर मासिक वेतन और मौत पर परिवार को लगभग 1.68 लाख डॉलर मुआवजे का प्रस्ताव दिया गया था.
केंद्र सरकार का कहना है कि सभी मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है और प्रभावित परिवारों की मदद के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं.