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'बिबी, अकेले पड़ जाओगे', ईरान पर हमले से पहले ट्रंप की नेतन्याहू को चेतावनी

ईरान-इजरायल तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया दावा किया है. ट्रंप के दावे के अनुसार उनके और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच एक अहम फोन कॉल हुआ. ट्रंप के अनुसार उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित हमले रोकने के लिए साफ शब्दों में चेतावनी दी थी.

Calendar Last Updated : 09 June 2026, 03:48 PM IST
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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को ईरान पर प्रस्तावित हमले रोकने के लिए सीधे फोन किया था. ट्रंप के अनुसार, उन्होंने नेतन्याहू को साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि यदि हालात को और भड़काया गया तो इजरायल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ सकता है.

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायल अप्रैल के बाद से ईरान के खिलाफ सबसे बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा था. योजना के तहत कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया जाना था. रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे ही अमेरिका को इस तैयारी की जानकारी मिली, राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू से संपर्क किया. बातचीत के दौरान ट्रंप ने उनसे संयम बरतने और किसी भी बड़े हमले से बचने की सलाह दी.

ट्रंप ने बाद में एक समाचार चैनल को बताया कि उन्होंने नेतन्याहू से कहा था कि उन्हें सावधानी से कदम उठाना चाहिए, क्योंकि लगातार सैन्य कार्रवाई इजरायल को अंतरराष्ट्रीय समर्थन से दूर कर सकती है. ट्रंप ने सोमवार को बताया कि, "मैंने कहा, ‘बीबी, तुम्हें सावधान रहना चाहिए, नहीं तो बहुत जल्द तुम अकेले पड़ जाओगे (या अकेले जंग लड़ना होगा).'" बता दें कि बीबी नेतन्याहू का निकनेम है.

फोन कॉल के बाद बदली रणनीति

रिपोर्ट में इजरायली अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि फोन पर दोनों नेताओं के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद भी सामने आए. हालांकि बातचीत के अंत में एक समझ बनी, जिसके तहत यदि ईरान की ओर से कोई नई सैन्य कार्रवाई नहीं होती है तो इजरायल अपने प्रस्तावित हमले रोक देगा. सूत्रों के अनुसार, बातचीत के बाद नेतन्याहू ने अपने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को योजनाबद्ध हमलों को रद्द करने का निर्देश दिया. इससे क्षेत्र में बढ़ रहे तनाव को कुछ हद तक कम करने में मदद मिली.

फिलहाल थमी है इजरायल-ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई

हालिया घटनाक्रम के बाद दोनों देशों ने संकेत दिए हैं कि फिलहाल प्रत्यक्ष सैन्य टकराव को रोका गया है. हालांकि हाल के हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया को एक बार फिर बड़े संघर्ष के मुहाने पर ला खड़ा किया था. तेहरान की ओर से सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा के कुछ समय बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा कि उस मोर्चे पर स्थिति नियंत्रण में है और फिलहाल तनाव कम हुआ है.

कैसे बढ़ा तनाव?

रविवार को ईरान ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ चल रही इजरायली सैन्य कार्रवाई के विरोध में इजरायल की ओर मिसाइलें दागी थीं. इसके जवाब में इजरायल ने भी सैन्य कार्रवाई की. हालांकि अमेरिका इस टकराव को बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रहा था, लेकिन जवाबी कार्रवाई के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए. इसके बाद ईरान ने मिसाइलों का एक और दौर शुरू किया, जिसके बाद अंततः युद्धविराम की घोषणा की गई. ईरान लगातार यह कहता रहा है कि लेबनान में इजरायल की सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं और यदि ये हमले जारी रहते हैं तो वह प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर होगा.

दोनों देशों ने दी चेतावनी

हालांकि फिलहाल स्थिति शांत दिखाई दे रही है, लेकिन दोनों पक्षों ने भविष्य को लेकर कड़े बयान दिए हैं. तेहरान ने स्पष्ट किया है कि यदि लेबनान में हमले जारी रहते हैं तो वह दोबारा कार्रवाई कर सकता है. वहीं नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि अगर इजरायल पर फिर कोई हमला हुआ तो उसका जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा. इससे पहले इजरायल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने भी कहा था कि लेबनान में सैन्य अभियान जारी रहेगा और उत्तरी इजरायल पर होने वाले हर हमले का जवाब दिया जाएगा.

अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते मतभेद

विश्लेषकों का मानना है कि हाल की घटनाएं अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक सोच में बढ़ते अंतर को भी दिखाती हैं. दोनों देश लंबे समय से सहयोगी रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात में उनके राजनीतिक और सुरक्षा हित पूरी तरह एक जैसे नहीं दिख रहे.

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की प्राथमिकता क्षेत्र में युद्ध को सीमित रखना और तनाव कम करना है, जबकि नेतन्याहू घरेलू राजनीतिक परिस्थितियों के कारण सुरक्षा मुद्दों पर सख्त रुख बनाए रखना चाहते हैं. एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया कि दोनों नेताओं के सामने अलग-अलग राजनीतिक चुनौतियां हैं. ऐसे में युद्ध और शांति को लेकर उनकी प्राथमिकताएं भी अलग नजर आती हैं. यही कारण है कि हाल के दिनों में वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच कई मुद्दों पर मतभेद खुलकर सामने आए हैं.

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