नई दिल्ली: अमेरिका की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज का एक सनसनीखेज ऑडियो लीक हो गया. इस ऑडियो ने न केवल रिपब्लिकन पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को उजागर किया है, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के रास्ते में असली दीवार कौन खड़ा कर रहा है. इस वायरल ऑडियो ने पूरे विश्व में सनसनी मचा दी है. कई लोगों का कहना है कि ट्रंप और वांस के बीच दरार आ गई है. वहीं यह ऑडियो किसने और कैसे लीक किया, यह किसी को नहीं पता है.
रिपोर्ट के मुताबिक टेड क्रूज को अपने समर्थकों और डोनर्स के साथ फोन कॉल पर बेहद आक्रामक अंदाज में सुना जा सकता है. उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप, वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस और ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो भारत के साथ व्यापार समझौते को जानबूझकर लटका रहे हैं. क्रूज को यह कहते सुना गया कि मैं भारत के साथ ट्रेड डील पक्की करने के लिए व्हाइट हाउस से लड़ रहा हूं. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने ट्रंप को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने भारत जैसे सहयोगियों पर भारी टैरिफ लगाना जारी रखा, तो वे सीनेट और हाउस दोनों हार जाएंगे.
विवाद की जड़ में वे टैरिफ हैं जो ट्रंप प्रशासन ने भारत पर थोपे हैं. ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाया था. भारत के रूस के साथ तेल व्यापार संबंधों से नाराज होकर ट्रंप ने इसे बढ़ाकर 50% कर दिया. टेड क्रूज जैसे नेता, जो टेक्सास का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस नीति का कड़ा विरोध कर रहे हैं क्योंकि इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं और व्यापारिक हितों को नुकसान पहुँच रहा है.
हैरानी की बात यह है कि इस विवाद के बीच अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक नरम संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि अगर भारतीय रिफाइनरियां रूसी तेल की खरीद कम करती हैं, तो ट्रंप प्रशासन भारत पर लगे टैरिफ में 25% की कटौती करने पर विचार कर सकता है. हालांकि, भारत सरकार ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है और अपनी स्वतंत्र ऊर्जा नीति पर कायम रहने की बात दोहराई है.
टेड क्रूज का यह स्टैंड उनकी 2028 की राष्ट्रपति पद की दावेदारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है. ट्रंप के प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले क्रूज खुद को भारत के स्वाभाविक सहयोगी' और चीन के खिलाफ मजबूत पार्टनर के रूप में पेश कर रहे हैं. टेड क्रूज के इस लीक ऑडियो ने यह साबित कर दिया है कि भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते अब अमेरिकी घरेलू राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बन चुके हैं.