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महाकुंभ जाने की है तैयारी? प्रयागराज के इन 5 मंदिरों का जरुर करें दर्शन

महाकुंभ जाने की तैयारी में है तो आप संगम में डुबकी लगाने के बाद 5 प्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन जरुर करें. इन मंदिरों का धार्मिक दृष्टि से काफी महत्त्व है. इन मंदिरों के दर्शन करने से महाकुंभ का अनुभव और भी खास हो जाएगा.

Calendar Last Updated : 26 December 2024, 08:10 AM IST
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Prayagraj Temples: अगले साल महाकुंभ लगने वाला है. 13 जनवरी से शुरू होने वाले इस मौके पर देश-विदेश के श्रद्धालु संगम तट पर पहुंचेगे. अगर आप इस बार महाकुंभ जाने की तैयारी में है तो आप संगम में डुबकी लगाने के बाद 5 प्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन जरुर करें. इन मंदिरों का धार्मिक दृष्टि से काफी महत्त्व है. इन मंदिरों के दर्शन करने से महाकुंभ का अनुभव और भी खास हो जाएगा. इन मंदिरों के दर्शन करने से हमें न केवल आध्यात्मिक शांति मिलेगी, बल्कि इस स्थान की सांस्कृतिक विरासत का भी अनुभव प्राप्त होगा.

1. संकटमोचन हनुमान मंदिर

यह मंदिर प्रयागराज में गंगा तट पर स्थित है. इसे लथे हुए हनुमान मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. माना जाता है हर साल मां गंगा सबसे पहले लथे हुए हनुमान को स्नान कराती हैं. हनुमान जी की यह खास मूर्ति 20 फीट ऊंची है. यहां दर्शन करने से लोगों के सारे दुख खत्म हो जाते हैं. सभी बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है. 

2. वेणी माधव मंदिर

वेणी माधव रो प्रयागराज की प्रथम देवी कहा जाता है. दरगंज में स्थित इस मंदिर में दुनिया भर से लोग दर्शन करने आते है. पौराणिक कथाओं में कहा जाता है कि प्रयागराज की रक्षा के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना करने के बाद ब्रह्मा जी ने इसकी स्थापना की थी.

3. पातालपुरी मंदिर

इस मंदिर में भगवान अपने अर्धनारीश्वर स्वरूप में विराजमान हैं और तीर्थों के राजा प्रयाग की मूर्ति भी यहां स्थापित है. इस मंदिर में शनिदेव को समर्पित एक अखंड ज्योति है जो सालों जलती रहती है.

4. नागवासुकी मंदिर

इस मंदिर में भगवान शंकर के गले में लटके, प्रभु श्री कृष्ण के कदमों के नीचे बैठे नाग देवता का है. यहां राजा वासुकी की पूजा की जाती है. कहा जाता है कि यहां के दर्शन किए बिना आपकी यात्रा पूरी नहीं हो सकती है. 

5. सरस्वती कूप और अक्षय वट

आप यहां मौजूद अक्षयवट और सरस्वती कूप के भी दर्शन कर सकते हैं. माना जाता है कि यहां मौजूद बरगद का पेड़ चारों युगों से यहीं है है. कहा जाता है कि अपने वनवास के दौरान त्रेता युग में भगवान श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण यहां आए थे और इसी पेड़ के नीचे विश्राम किया था.

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