नई दिल्ली: छोटे चार्टर विमानों से जुड़े हालिया हादसों ने देश को झकझोर कर रख दिया है. महज एक महीने के अंदर दो अलग-अलग दुर्घटनाओं में 12 लोगों की जान चली गई. जिसके बाद अब निजी और चार्टर उड़ानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. इन घटनाओं के मद्देनजर अब विमानन क्षेत्र में सख्ती बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है.
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) ने गैर-निर्धारित ऑपरेटर परमिट (एनएसओपी) यानी चार्टर और निजी जेट कंपनियों के लिए नई व्यवस्था प्रस्तावित की है. इसके तहत ऑपरेटरों को उनके सुरक्षा रिकॉर्ड के आधार पर रैंकिंग दी जाएगी, जिसे डीजीसीए की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा. साथ ही, कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर विमान की उम्र, रखरखाव का विवरण और पायलटों के अनुभव जैसी महत्वपूर्ण जानकारी साझा करना अनिवार्य होगा.
नियामक ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रोफेशनल प्रेशर से ऊपर सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी. अगर पायलट-इन-कमांड सुरक्षा कारणों से उड़ान रद्द, स्थगित या डायवर्ट करने का फैसला करता है, तो वह अंतिम माना जाएगा. ऑपरेटरों को इस निर्णय का सम्मान करना होगा, चाहे इससे व्यावसायिक नुकसान ही क्यों न हो.
उड़ान अवधि सीमा (एफडीटीएल) के उल्लंघन या न्यूनतम सुरक्षा मानकों से समझौता करने पर पायलट का लाइसेंस पांच साल तक निलंबित किया जा सकता है. वहीं नियमों का पालन न करने वाले ऑपरेटरों का लाइसेंस भी रद्द किया जाएगा. वरिष्ठ प्रबंधन को भी सिस्टमिक खामियों के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा.
इसके साथ ही निगरानी में भी बढ़ोतरी होगी. डीजीसीए कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) ऑडिट बढ़ाएगा और ईंधन रिकॉर्ड व तकनीकी लॉग का मिलान करेगा ताकि किसी भी तरह की अनियमितता पकड़ी जा सके. पुराने विमानों और स्वामित्व बदलने वाले बेड़ों पर विशेष नजर रखी जाएगी.
इतना ही नहीं बल्कि जो कंपनियां इनका रखरखाव खुद करती है उन्हें एमआरओ संस्थानों को यह जिम्मेदारी सौंपनी पड़ सकती है. साथ ही पायलटों के प्रशिक्षण में मौसम संबंधी डिसीजन मेकिंग और एसओपी के कड़ाई से पालन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.