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'अमेरिका ने नहीं की मध्यस्थता', भारत-पाकिस्तान युद्धविराम को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर जयशंकर का बयान

डच ब्रॉडकास्टर एनओएस से बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत और पाकिस्तान ने युद्धविराम के लिए सीधे बात की. हमने अमेरिका सहित सभी देशों से कहा कि अगर समझौता करना है, तो सीधे हमसे बात करें. उन्होंने स्पष्ट किया कि यही कारण है कि युद्धविराम संभव हुआ. 

Calendar Last Updated : 22 May 2025, 02:09 PM IST
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S Jaishankar: भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्धविराम को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने इसकी मध्यस्थता की है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने साफ कहा कि दोनों देशों ने सीधे बातचीत कर युद्धविराम लागू किया.

डच ब्रॉडकास्टर एनओएस से बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत और पाकिस्तान ने युद्धविराम के लिए सीधे बात की. हमने अमेरिका सहित सभी देशों से कहा कि अगर समझौता करना है, तो सीधे हमसे बात करें. उन्होंने स्पष्ट किया कि यही कारण है कि युद्धविराम संभव हुआ. 

पाकिस्तान की पहल

जयशंकर ने बताया कि 10 मई को युद्धविराम से पहले तनाव कम करने का प्रस्ताव पाकिस्तान की ओर से आया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने संदेश भेजा कि वे गोलीबारी रोकने को तैयार हैं. हमने उसी आधार पर जवाब दिया. विदेश मंत्री ने दोहराया कि इस प्रक्रिया में किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी. जयशंकर ने चुटकी लेते हुए कहा कि अमेरिका तो अमेरिका में ही था. उन्होंने बताया कि कई देशों ने चार दिन के संघर्ष के दौरान भारत से संपर्क किया. अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों, जैसे विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति ने भी चिंता जताई. लेकिन जयशंकर ने साफ किया कि इन देशों ने केवल अपनी चिंताएं व्यक्त कीं, कोई मध्यस्थता नहीं की.

भारत का स्पष्ट संदेश

विदेश मंत्री ने कहा कि हमने सभी देशों से एक बात साफ कहा कि अगर पाकिस्तान युद्ध खत्म करना चाहता है, तो उसे सीधे भारत से बात करना होगा. उन्होंने बताया कि हमारे बातों को मानते हुए पाकिस्तान ने ऐसा ही किया. पाकिस्तानी सेना ने भारत से सीधे संपर्क किया और युद्धविराम पर सहमति बनी. जयशंकर के बयान ने भारत की कूटनीतिक दृढ़ता को उजागर किया. उन्होंने साफ किया कि भारत अपनी शर्तों पर बात करता है. यह युद्धविराम भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी बातचीत का नतीजा था. इसने भारत की स्वतंत्र और मजबूत विदेश नीति को फिर से रेखांकित किया. 

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