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पाकिस्तान की नोबेल सिफारिश पर ओवैसी का तीखा हमला, ईरान पर अमेरिकी हमले को लेकर उठाया सवाल

हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान और अमेरिका की मंशा पर सवाल उठाया है. ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा कि क्या पाकिस्तान ने ट्रंप को इसलिए नोबेल पुरस्कार के लिए चुना, ताकि वे ईरान पर बम बरसाएं?

Calendar Last Updated : 22 June 2025, 04:57 PM IST
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Asaduddin Owaisi: AIMIM प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान के उस फैसले पर करारा प्रहार किया, जिसमें उसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था.

पाकिस्तान द्वारा यह सिफारिश अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला किए जाने के एक दिन पहले की गई थी. इसके अगले ही दिन अमेरिका ने ईरान की तीन प्रमुख परमाणु सुविधाओं पर बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स से हमला किया. 

बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स से ईरान पर हमला

असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान आर्मी चीफ असीम मुनीर के अमेरिका यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या जनरल असीम मुनीर ने इसके लिए व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ लंच किया था? आज उनका असली चेहरा बेनकाब हो गया. उन्होंने पाकिस्तान की इस सिफारिश को हास्यास्पद बताया, खासकर जब अगले ही दिन उसने अमेरिकी हमलों की निंदा की.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी सेना ने ईरान के फोर्डो, नतांज़ और इस्फ़हान परमाणु स्थलों पर हमले किए. इन हमलों में छह बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स ने 12 बंकर-बस्टर बम गिराए. यह पहली बार था जब अमेरिका ने मध्य पूर्व में ईरान के खिलाफ इस हथियार का इस्तेमाल किया. 

इजरायल पर भी बोला हमला

ओवैसी ने इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भी आड़े हाथ लिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका का यह हमला नेतन्याहू को फायदा पहुंचाने वाला है, जो गाजा में 55,000 से ज़्यादा फिलिस्तीनियों का कत्ल कर चुके हैं. वे फिलिस्तीनियों का नरसंहार कर रहे हैं और अमेरिका को इसकी कोई परवाह नहीं है. ओवैसी ने नेतन्याहू को फिलिस्तीनियों का कसाई करार दिया. ओवैसी ने ईरान के परमाणु खतरे को “बूगी” यानी झूठा प्रचार बताया.

उन्होंने कहा कि इराक और लीबिया में भी यही दावा किया गया था कि वहां सामूहिक विनाश के हथियार हैं, लेकिन कुछ नहीं मिला. उन्होंने चेतावनी दी कि मध्य पूर्व में युद्ध भारत के लिए गंभीर खतरा है. ओवैसी ने कहा कि मीडिल ईस्ट में 16 मिलियन से भी ज्यदा भारतीय रहते हैं. अगर वहां युद्ध हुआ, तो इसका भारत पर बुरा असर पड़ेगा. भारतीय कंपनियों का बड़ा निवेश इस क्षेत्र में है और विदेशी निवेश का भी काफी हिस्सा यहीं से आता है. 

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