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नई दिल्ली: असम के जोरहाट एयरबेस पर भारतीय वायुसेना के एक AN-32 परिवहन विमान के साथ बड़ा हादसा हो गया. घटना उस समय हुई जब विमान अपनी उड़ान पूरी कर एयरबेस पर उतर रहा था. शुरुआती जानकारी के अनुसार, लैंडिंग के बाद विमान में आग लग गई, जिससे एयरबेस पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया. राहत की बात यह रही कि मौके पर मौजूद आपातकालीन सेवाओं ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आग पर नियंत्रण पा लिया. फिलहाल दुर्घटना के पीछे की असली वजह का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है.
प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक विमान सामान्य रूप से रनवे पर उतरने के बजाय एयरबेस के ऐसे हिस्से में पहुंच गया, जहां जमीन समतल नहीं थी और घास भी मौजूद थी. इसी दौरान हादसा हुआ और विमान में आग लग गई. घटना की जानकारी मिलते ही एयरबेस की फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम मौके पर पहुंची. उन्होंने तेजी से बचाव अभियान चलाकर आग को फैलने से रोका. सुरक्षा कारणों से पूरे इलाके को घेर लिया गया और स्थिति को नियंत्रण में लाया गया.
सूत्रों के अनुसार, विमान के उतरने के दौरान तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी थी. इसके बाद विमान में आग भड़क गई. कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि दुर्घटना के बाद विमान दो हिस्सों में टूट गया. हालांकि विमान में सवार चालक दल और अन्य वायुसेना कर्मियों की स्थिति को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. वायुसेना की ओर से कहा गया है कि मामले की जांच की जा रही है और जैसे-जैसे जानकारी मिलेगी, उसे साझा किया जाएगा.
भारतीय वायुसेना ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जोरहाट में एक AN-32 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है. फिलहाल तकनीकी विशेषज्ञों और जांच अधिकारियों की टीम हादसे के कारणों की पड़ताल कर रही है. जांच में यह देखा जाएगा कि दुर्घटना किसी तकनीकी खराबी, मौसम संबंधी कारण या लैंडिंग के दौरान हुई किसी अन्य समस्या की वजह से हुई या नहीं. वायुसेना ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
AN-32 भारतीय वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण परिवहन विमानों में से एक माना जाता है. इसे मूल रूप से सोवियत संघ के एंटोनोव डिजाइन ब्यूरो ने विकसित किया था. यह विमान AN-26 का उन्नत संस्करण है और विशेष रूप से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में संचालन के लिए तैयार किया गया है. भारत ने 1980 के दशक में इस विमान को अपने बेड़े में शामिल किया था और तब से यह कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों का हिस्सा रहा है. ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में रसद पहुंचाने में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है.
भारतीय वायुसेना AN-32 का उपयोग सैनिकों, सैन्य उपकरणों, हथियारों और राहत सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए करती है. यह विमान विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों, पूर्वोत्तर राज्यों और दुर्गम सीमावर्ती इलाकों में आपूर्ति पहुंचाने के लिए जाना जाता है. इसकी एक बड़ी खासियत यह है कि यह अपेक्षाकृत छोटे रनवे पर भी आसानी से उड़ान भर सकता है और उतर सकता है. विमान लगभग 6.7 टन तक का भार ले जाने में सक्षम है और इसमें 40 से अधिक सैनिकों को एक साथ ले जाया जा सकता है.
भारतीय वायुसेना के पास लंबे समय तक 100 से अधिक AN-32 विमान सक्रिय सेवा में रहे हैं. समय-समय पर इनमें आधुनिक तकनीक जोड़ी गई है, जिसमें उन्नत नेविगेशन सिस्टम, आधुनिक एवियोनिक्स और सुरक्षा उपकरण शामिल हैं. हालांकि इन विमानों की उम्र बढ़ने के कारण भविष्य में इन्हें नए परिवहन विमानों से बदलने की योजना पर भी काम किया जा रहा है. इसके बावजूद AN-32 आज भी भारतीय वायुसेना के सबसे भरोसेमंद विमानों में गिना जाता है और सैन्य अभियानों, राहत कार्यों तथा मानवीय सहायता मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.