नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के संवेदनशील जिले मुर्शिदाबाद में शनिवार को माहौल गर्म हो गया. निलंबित तृणमूल कांग्रेस MLA हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की बरसी के दिन बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद के निर्माण का शिलान्यास किया. यह कार्यक्रम भारी पुलिस सुरक्षा के बीच आयोजित किया गया, जिससे इलाके में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन गई.
दोपहर में कुरान पाठ के बाद समारोह हुआ. जिसमें कबीर ने दावा किया कि सऊदी अरब के दो मौलवियों और 2,000 से अधिक लोग शामिल हुए. कार्यक्रम में ‘नारा-ए-तकबीर’ और ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाए गए.
सोशल मीडिया पर आए वीडियो में कबीर के समर्थक बेलडांगा में सिर पर ईंटें ढोते दिखे, मानो यह स्थल किसी किले में बदल गया हो. इस दौरान दंगा पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल लगातार गश्त करते रहे, ताकि किसी भी तरह की सांप्रदायिक घटना को रोका जा सके. कबीर को इस विवादास्पद प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद ही TMC ने सस्पेंड कर दिया था. उनके इस कदम की BJP ने कड़ी आलोचना की और इसे राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया. कबीर ने कहा कि समारोह में बाधा डालने की कोशिशें हो रही थीं, लेकिन जिला प्रशासन और पुलिस ने पूरा सहयोग दिया, जिससे कार्यक्रम बिना रुकावट पूरा हुआ. यह विवाद कलकत्ता हाई कोर्ट तक गया.
कोर्ट ने निर्माण कार्य में दखल देने से इनकार कर दिया, लेकिन ममता सरकार को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए. इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके. इस पूरे विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस ने कार्यक्रम से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया. शांतिपूर्ण संदेश देने के लिए पार्टी ने शनिवार को ‘संहति दिवस’ (एकता दिवस) मनाने का फैसला किया. हालांकि, TMC के इस कदम के बावजूद BJP ने सरकार को घेरना जारी रखा. BJP का आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनावी लाभ के लिए मुसलमानों को पोलराइज़ करने के मकसद से कबीर को आगे ला रही हैं.