दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट में पिछले एक महीने से जारी तनाव के कारण भारत में रसोई गैस की आपूर्ति पर बुरा असर पड़ा था. हालांकि अब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर होने से तनाव में कमी आई है, लेकिन देश के भीतर पैदा हुए गैस संकट को नियंत्रित करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्यों और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के लिए एलपीजी वितरण का नया खाका तैयार किया है ताकि जरूरी सेवाओं में रुकावट न आए.
मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल द्वारा जारी नए पत्र के अनुसार, अब राज्यों को कुल एलपीजी आपूर्ति का 70 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया जाएगा. इसमें 10 प्रतिशत का अतिरिक्त कोटा उन राज्यों के लिए आरक्षित रखा गया है जो पाइपलाइन नेचुरल गैस (पीएनजी) जैसे वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने में सक्रिय सुधार करेंगे. इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की किल्लत से बचाना और एलपीजी पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है. सरकार का यह कदम भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत बदलाव है.
गैस सप्लाई के दबाव को कम करने के लिए औद्योगिक क्षेत्र पर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं. फार्मा, फूड प्रोसेसिंग, स्टील और पेंट जैसे प्रमुख सेक्टर्स को मार्च 2026 तक उनकी औसत खपत का केवल 70 प्रतिशत हिस्सा ही प्राप्त होगा. इसके अतिरिक्त, इन उद्योगों के लिए प्रतिदिन 0.2 मीट्रिक टन की अधिकतम आपूर्ति सीमा भी तय कर दी गई है. इस फैसले से उन फैक्ट्रियों के सामने उत्पादन का संकट खड़ा होने की आशंका है जो पूरी तरह एलपीजी पर ही आश्रित हैं. सरकार चाहती है कि उद्योग जल्द से जल्द पीएनजी जैसे विकल्पों की ओर रुख करें.
केंद्र सरकार ने आवंटन प्रक्रिया में उन औद्योगिक इकाइयों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है जहां एलपीजी का उपयोग कच्चे माल के तौर पर अनिवार्य है. ऐसी विशिष्ट प्रक्रियाओं वाली इकाइयों को पीएनजी के लिए आवेदन करने की शर्त से छूट दी गई है क्योंकि उनके कार्यों को वैकल्पिक ईंधन से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता. अन्य सामान्य उद्योगों को तेल विपणन कंपनियों में अपना पंजीकरण कराना होगा और पीएनजी कनेक्शन के लिए आधिकारिक तौर पर आवेदन करना अनिवार्य होगा. यह व्यवस्था संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और उद्योगों को आधुनिक बनाने के लिए की गई है.
समुद्री मार्ग बाधित होने के कारण भारत में न केवल व्यावसायिक बल्कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर के लिए भी लंबी कतारें देखी गई थीं. गैस की कमी का असर अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ता है, खासकर तब जब गुजरात जैसे राज्यों में पीएमजेएवाई-एमए योजना के तहत लाखों कैंसर रोगियों का मुफ्त उपचार चल रहा है. ऊर्जा संकट स्वास्थ्य सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के सुचारू संचालन में बाधा उत्पन्न कर सकता है. इसलिए सरकार ने एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ बुकिंग की समय सीमा में भी कई अहम बदलाव किए हैं ताकि आम जनता को राहत मिल सके.
सरकार ने अब राज्यों से पाइपलाइन वितरण आदेशों और सीबीजी (कंप्रेस्ड बायो गैस) पॉलिसी को युद्धस्तर पर लागू करने के लिए कहा है. भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और पीएनजी नेटवर्क का विस्तार करना अनिवार्य हो गया है. सीजफायर के बाद जहाजों की आवाजाही शुरू होने से आपूर्ति श्रृंखला में सुधार की उम्मीद है, लेकिन भारत अब आत्मनिर्भरता पर अधिक जोर दे रहा है. वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाकर ही देश अपनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक उतार-चढ़ाव और संघर्षों के प्रभाव से सुरक्षित रख सकता है.