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डब्ल्यूईएफ की वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए दावोस पहुंचे चिराग पासवान ने भारतीय खाद्य उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ावा देने की बात की. उन्होंने कहा कि भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र में वैश्विक बाजारों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं, और यह क्षेत्र वैश्विक स्तर पर एक मजबूत उपस्थिति बना सकता है.
चिराग पासवान ने विशेष रूप से ग्रामीण भारत की बात करते हुए कहा, "मैं ग्रामीण क्षेत्रों की बात कर रहा हूं, सिर्फ बड़े या मझोले श्रेणी के शहरों की नहीं." उनका मानना है कि भारतीय खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और विविधता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए, ताकि भारतीय किसान और उद्यमी वैश्विक व्यापार से अधिक लाभ उठा सकें.
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय खाद्य उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए बेहतर रणनीतियों और व्यापार नेटवर्क की आवश्यकता है. भारत के विशाल कृषि क्षेत्र और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पादों के चलते, वैश्विक बाजारों में इसकी संभावनाओं का दोहन करने का समय अब आ चुका है.
चिराग पासवान ने आगे बताया कि भारतीय खाद्य उद्योग में विकास के अनेक अवसर हैं, खासकर उन उत्पादों के लिए जो प्राकृतिक और पौष्टिकता से भरपूर होते हैं. उन्होंने भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग को एक वैश्विक ब्रांड बनाने के लिए निर्यात के अवसरों को पहचानने पर जोर दिया.
चिराग पासवान ने यह भी कहा कि भारत का विशाल कृषि क्षेत्र और उसकी समृद्ध खाद्य परंपराएं इसे वैश्विक खाद्य उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना सकती हैं. भारतीय किसान और उद्यमी अंतरराष्ट्रीय व्यापार में हिस्सा लेकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं.
उन्होंने भारतीय खाद्य उत्पादों की निर्यात बढ़ाने के लिए वैश्विक स्तर पर व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया. उनका मानना है कि यदि उचित कदम उठाए जाएं तो भारतीय खाद्य उद्योग को वैश्विक बाजार में एक नई पहचान मिल सकती है.
(इस खबर को भारतवर्ष न्यूज की टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की हुई है)