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'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी पर न करें भरोसा...,' औरंगजेब कब्र विवाद पर बोले राज ठाकरे

राज ठाकरे ने मुंबई के शिवाजी पार्क में गुड़ी पड़वा रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने भ्रामक ऐतिहासिक पोस्ट और व्हाट्सएप फॉरवर्ड के खिलाफ चेतावनी दी. साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि इतिहास का अध्ययन सोशल मीडिया के बजाय विश्वसनीय स्रोतों से किया जाना चाहिए.

Calendar Last Updated : 31 March 2025, 09:31 AM IST
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Raj Thackeray on Aurangzeb Row: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने नागपुर में कुछ दिनों पहले भड़की सांप्रदायिक हिंसा की निंदा की. उन्होंने औरंगजेब की कब्र को लेकर सांप्रदायिक तनाव भड़काने के प्रयासों पर हमला बोलते हुए लोगों से जाति और धर्म के चश्मे से इतिहास को न देखने का आग्रह किया. 

मुंबई के शिवाजी पार्क में अपनी वार्षिक गुड़ी पड़वा रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने भ्रामक ऐतिहासिक पोस्ट और व्हाट्सएप फॉरवर्ड के खिलाफ चेतावनी दी. साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि इतिहास का अध्ययन सोशल मीडिया के बजाय विश्वसनीय स्रोतों से किया जाना चाहिए.

विभाजनकारी राजनीति का शिकार ना होनें का संदेश

ठाकरे ने ऐसी बहसों की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमें जल निकायों और पेड़ों की चिंता नहीं है, लेकिन हमें औरंगजेब की कब्र की चिंता है? उन्होंने विभाजनकारी राजनीति का शिकार होने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि लोगों को इतिहास के नाम पर लड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है और राजनेता संघर्ष को बढ़ावा देने के लिए इन मुद्दों का फायदा उठाते हैं. ठाकरे ने इस बात पर जोर दिया कि मुगल बादशाह औरंगजेब ने मराठों से लड़ते हुए महाराष्ट्र में 27 साल बिताए, छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत को कुचलने की कोशिश की. लेकिन आखिरकार वह असफल रहा.

कब्र को हटाने की मांग पर प्रतिक्रिया

उन्होंने कहा कि औरंगजेब शिवाजी नामक एक विचार को मारना चाहता था. लेकिन शिवाजी महाराज के निधन के बावजूद, औरंगजेब उनकी विचारधारा को मिटाने के असफल प्रयास में महाराष्ट्र में रहा. उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि शिवाजी के बेटे संभाजी महाराज ने औरंगजेब के बेटे को शरण भी दी थी. औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए, ठाकरे ने सुझाव दिया कि वहां एक बोर्ड लगाया जाना चाहिए. जिसमें लिखा हो, हमने इस राजा को मार डाला.

उन्होंने शिवाजी महाराज द्वारा मारे गए बीजापुर के सेनापति अफजल खान की कब्र को भी संबोधित किया. उन्होंने कहा कि इसे शिवाजी की अनुमति के बिना नहीं बनाया जा सकता था. उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं को सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल करने के बजाय उनके उचित संदर्भ में समझा जाना चाहिए.

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