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ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी? सीमावर्ती राज्यों में मॉक ड्रिल की तैयारी

पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमा वाले राज्यों में मॉक ड्रिल की तैयारी की जा रही है. जिससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है? गृह मंत्रालय के निर्देश पर मॉक ड्रिल आयोजित की जा  रही है.

Calendar Last Updated : 28 May 2025, 03:38 PM IST
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Operation Sindoor: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच गुरुवार शाम को मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी. यह ड्रिल गुजरात, पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में होगी. ये राज्य हाल ही में चार दिन के संघर्ष में सीमा पार से हमले झेल चुके हैं. सूत्रों ने बताया कि लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए जाएंगे. मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपात स्थिति में लोगों को तैयार करना है.

गृह मंत्रालय के निर्देश पर ड्रिल आयोजित की जा  रही है. इससे पहले 7 मई को 'ऑपरेशन अभ्यास' नाम से राष्ट्रव्यापी ड्रिल हुई थी. यह ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से कुछ घंटे पहले था. एक बार फिर गुरुवार की ड्रिल में नागरिकों को सुरक्षा उपाय सिखाए जाएंगे. इस खबर ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर फिर से सवाल खड़ा कर दिया है.

युद्ध के समय खुद की सुरक्षा

पिछली मॉक ड्रिल में हवाई हमले के सायरन बजाए गए. नागरिकों और छात्रों को सुरक्षा प्रोटोकॉल की जानकारी दी गई. उन्हें बताया गया कि हमले के दौरान खुद को कैसे बचाएं. यह ड्रिल 1971 के युद्ध के बाद पहली थी. इसे 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 250 जगहों पर आयोजित किया गया. पंजबा पाकिस्तान के साथ 500 किलोमीटर से भी ज्यादा का सीमा साझा करता है, जिसकी वजह से यहां खास प्रबंध किए गए हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पंजाब हाई अलर्ट पर था. सभी सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द किए गए. फिरोजपुर, पठानकोट, फाजिल्का, अमृतसर, गुरदासपुर और तरनतारन में स्कूल बंद रहे. सुरक्षा बलों ने सीमा पर निगरानी बढ़ाई.

सीमावर्ती इलाकों में कड़ी  सुरक्षा

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद किए गए. सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा कड़ी की गई. स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान और भी ज्यादा बौखला गए थे. जिसके बाद उन्होंने हमला शुरू कर दिया. हालांकि भारत ने इसका मजबूत जवाब दिया. मॉक ड्रिल इस ऑपरेशन का हिस्सा है. मॉक ड्रिल में नागरिकों को आपात स्थिति में व्यवहार सिखाया जाएगा. सायरन सुनते ही सुरक्षित स्थान पर जाना होगा. स्कूलों और कॉलेजों में बच्चों को प्रोटोकॉल समझाए जाएंगे. यह ड्रिल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी.

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