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Bihar Assembly Elections: बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं. चुनाव आयोग के साथ-साथ सभी पार्टियां काम शुरु करने लगी है. इसी क्रम में रविवार को कांग्रेस पार्टी की ओर से 58 पर्यवेक्षकों के नाम की घोषणा कर दी गई है. जिसमें अशोक चांदना और अखिलेश यादव भी शामिल है. पिछले चुनाव में कांग्रेस ने सभी सीटों पर चुनव लड़ी लेकिन केवल 19 सीटों पर ही जीत मिल पाई थी.
चुनाव आयोग कुछ दिनों बाद 2003 की मतदाता सूची वेबसाइट अपलोड की जा रही है. इससे 4.96 करोड़ मतदाताओं को फायदा होगा. इन मतदाताओं को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान अतिरिक्त दस्तावेज जमा नहीं करने होंगे. बाकी 3 करोड़ मतदाताओं को अपनी पात्रता के लिए 11 स्वीकृत दस्तावेजों में से एक देना होगा. यदि माता-पिता का नाम 2003 की सूची में है, तो केवल जन्म प्रमाण देना काफी होगा. यह कदम मतदाता सूची को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए उठाया गया है.
चुनाव आयोग ने पारदर्शिता के लिए बूथ-स्तरीय एजेंट (बीएलए) नियुक्त करने को कहा है. अब तक 1.54 लाख बीएलए नियुक्त हो चुके हैं. आयोग ने और नियुक्तियों को प्रोत्साहित किया है. प्रत्येक मतदाता को बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) से गणना फॉर्म मिलेगा. हालांकि इसे ऑनलाइन भी प्राप्त किया जा सकता है. बीएलओ फॉर्म जमा करेंगे और पावती देंगे. इसके आधार पर मसौदा मतदाता सूची तैयार होगी. सटीकता के लिए घर-घर सत्यापन भी होगा. विपक्षी दलों ने मतदाता सूची संशोधन पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि इससे कुछ मतदाताओं को बाहर किया जा सकता है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इन आरोपों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य सभी पात्र मतदाताओं को शामिल करना है. यह संवैधानिक दायित्व है. आयोग ने कहा कि संशोधन अनुच्छेद 326 के तहत जरूरी है. यह प्रक्रिया गैर-नागरिकों को हटाने और सूची को साफ करने के लिए है.
चुनाव आयोग ने फर्जी नामांकन रोकने के लिए विशेष कदम उठाए हैं. बिहार के बाहर से आने वाले और 1987 के बाद जन्मे आवेदकों को जन्म तिथि और स्थान के दस्तावेज देने होंगे. यह विदेशी प्रवासियों द्वारा अवैध प्रविष्टियों को रोकने के लिए है. आयोग ने इसके लिए 'घोषणा पत्र' शुरू किया है. अभी के समय में 7 करोड़ से ज्यादा पंजीकृत मतदाता हैं. शहरी प्रवास, नई मौतें और अवैध प्रविष्टियों के कारण संशोधन जरूरी है. आयोग का लक्ष्य त्रुटि-मुक्त मतदाता सूची बनाना है. बिहार के अलावा असम, केरल और अन्य राज्यों में भी संशोधन होगा, लेकिन बिहार को प्राथमिकता दी गई है.