लोकसभा में राहुल गांधी का हंगामा, जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब के अंश पढ़ने की कोशिश

लोकसभा में उस समय बड़ा हंगामा मच गया जब राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब के कुछ अंश पढ़े. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे नियमों के खिलाफ बताया.

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नई दिल्ली: सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान लोकसभा का माहौल काफी गरमा गया. विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की आने वाली किताब फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी के कुछ अप्रकाशित अंशों का हवाला देते हुए सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने लद्दाख और गलवान मुद्दों पर सैन्य फैसलों की आलोचना की. सत्ताधारी पार्टी ने नियमों और संसदीय परंपराओं का हवाला देते हुए आपत्ति जताई और इसे सदन की मर्यादा के खिलाफ बताया.

द कारवां मैगजीन

राहुल गांधी ने सदन में दावा किया कि जनरल नरवणे की किताब लद्दाख संकट के दौरान राजनीतिक नेतृत्व और सेना के बीच तालमेल की कमी को उजागर करती है. उन्होंने अपने दावों का आधार द कारवां मैगजीन में प्रकाशित अंशों को बनाया. इन अंशों के जरिए राहुल ने आरोप लगाया कि जून 2020 में गलवान संघर्ष के दौरान सैन्य अधिकारियों को उच्च स्तर से पर्याप्त निर्देश नहीं मिल रहे थे. उनके इस बयान से सदन में रक्षा नीति को लेकर एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई शुरू हो गई.

रक्षा मंत्री की कड़ी आपत्ति

राहुल गांधी ने जैसे ही अंश पढ़ना शुरू किया, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत हस्तक्षेप किया. उन्होंने आपत्ति जताई कि जो किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है और रक्षा मंत्रालय द्वारा समीक्षाधीन है, उसे संसद में उद्धृत नहीं किया जा सकता. सिंह ने राहुल से बार-बार पूछा कि क्या उनके पास किताब की प्रकाशित प्रति है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिना प्रकाशन के किसी भी सामग्री को सदन में सत्यापित तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता.

स्पीकर का फैसला और नियम

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी इस संवेदनशील मामले में हस्तक्षेप किया और राहुल को संसदीय नियमों की याद दिलाई. उन्होंने स्पष्ट किया कि अप्रकाशित सामग्री का हवाला देना स्थापित परंपराओं के खिलाफ है. स्पीकर ने मांग की कि राहुल गांधी जो पढ़ रहे हैं, उसकी प्रामाणिकता साबित करें. उन्होंने चेतावनी दी कि बिना किसी ठोस आधार के ऐसे बयान रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बन सकते. इस दौरान विपक्ष और सत्ताधारी पार्टी के सांसदों के बीच जोरदार नारेबाजी और तीखी बहस हुई.

गलवान संघर्ष की पृष्ठभूमि

यह पूरी बहस 15 जून 2020 की उस दुर्भाग्यपूर्ण रात से जुड़ी है, जब गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इस हमले में भारतीय सेना को जानमाल का नुकसान हुआ था, जिसमें पत्थरों और लाठियों का इस्तेमाल किया गया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक जनरल नरवणे की किताब में उस तनावपूर्ण दौर में हुई मीटिंग्स और मिलिट्री फैसलों का डिटेल में जिक्र है. राहुल गांधी ने तर्क दिया कि ये अंश सच्चाई बताते हैं. वहीं सरकार का कहना है कि इसमें बहुत ही सीक्रेट मिलिट्री जानकारी है.

संसद में बढ़ता राजनीतिक तनाव

इस बहस के बीच, बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी कांग्रेस पार्टी पर हमला किया. उसके बाद गृह मंत्री अमित शाह को दखल देना पड़ा. इस 65 दिन लंबे सेशन के दौरान कई और जरूरी मुद्दों पर भी चर्चा होनी है. विपक्ष चीन के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि सीमा सुरक्षा सबसे जरूरी है. उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही संसद में इन सभी आरोपों का डिटेल में जवाब देंगे, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल और ज़्यादा गरमा सकता है.

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