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उच्चतम न्यायालय उपासना स्थल अधिनियम से जुड़ी याचिकाओं पर 17 फरवरी को करेगा सुनवाई

नयी दिल्ली :  उच्चतम न्यायालय उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 से संबंधित याचिकाओं पर आगामी 17 फरवरी, सोमवार को सुनवाई करेगा. न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड की गई कार्यसूची के अनुसार, प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. 

Calendar Last Updated : 15 February 2025, 02:18 PM IST
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नयी दिल्ली :  उच्चतम न्यायालय उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 से संबंधित याचिकाओं पर आगामी 17 फरवरी, सोमवार को सुनवाई करेगा. न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड की गई कार्यसूची के अनुसार, प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. 

यह अधिनियम धार्मिक स्थलों के स्वरूप में बदलाव पर प्रतिबंध लगाता है और 15 अगस्त 1947 तक के धार्मिक स्वरूप को बनाए रखने की बात करता है. हालांकि, अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है.

उच्चतम न्यायालय ने पहले 'ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन' (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की याचिका पर विचार करते हुए उपासना स्थल कानून को लागू करने की मांग पर 2 जनवरी को सुनवाई के लिए सहमति दी थी. 

पीठ ने पिछले साल 12 दिसंबर को आदेश जारी करते हुए देश की अदालतों को धार्मिक स्थलों, विशेषकर मस्जिदों और दरगाहों पर कोई नया मुकदमा दायर करने से रोकने का निर्देश दिया था. इसके अलावा, लंबित मामलों में भी कोई प्रभावी अंतरिम या अंतिम आदेश पारित करने पर रोक लगाई थी.

इस आदेश का असर वाराणसी में ज्ञानवापी, मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद और संभल में शाही जामा मस्जिद से संबंधित लगभग 18 मुकदमों पर पड़ा था. इन मुकदमों में धार्मिक स्थलों के मूल स्वरूप का पता लगाने के लिए सर्वेक्षण की मांग की गई थी. इसके परिणामस्वरूप कुछ विवाद भी उत्पन्न हुए थे, जिसमें संभल में सर्वेक्षण के दौरान हिंसा और चार लोगों की मौत हो गई थी.

पीठ का कहना था कि चूंकि मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए नए मुकदमों की दायरगी पर रोक लगानी चाहिए. 

इस मामले में मुख्य विवाद उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम की धारा तीन और चार से संबंधित है, जिनमें धार्मिक स्थलों के स्वरूप को बदलने पर रोक और इन पर अदालतों के अधिकारक्षेत्र के बारे में प्रावधान शामिल हैं. 

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