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तुहिन कांत पांडे बने SEBI के नए अध्यक्ष, माधवी पुरी बुच का कार्यकाल होगा खत्म

SEBI Chief:  भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने तुहिन कांता पांडे को अगले तीन साल के कार्यकाल के लिए अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. माधबी पुरी बुच का अध्यक्ष पद पर 1 मार्च तक के लिए कार्यकाल है.

Calendar Last Updated : 28 February 2025, 06:46 AM IST
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SEBI Chief: तुहिन कांता पांडे को अगले तीन साल के कार्यकाल के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. माधबी पुरी बुच का कार्यकाल 1 मार्च को समाप्त होने जा रहा है, इससे पहले नए सेबी अध्यक्ष की नियुक्ति की गई है. 

सरकारी आदेश जारी करते हुए कहा गया कि "मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने तुहिन कांता पांडे, आईएएस (ओआर:1987), वित्त सचिव और राजस्व विभाग के सचिव को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष के पद पर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है.  पांडे तीन साल की अवधि के लिए इस पद पर रहेंगे. 

माधबी पुरी का कार्यकाल खत्म

माधबी पुरी बुच का अध्यक्ष पद पर 1 मार्च तक के लिए कार्यकाल है. उनके कार्यकाल के खत्म होने से पहले सरकार ने जनवरी ने इस पद के लिए वेकेंसी निकाली थी. जिसमें अप्लाई करने की अंतिम तिथि 17 फरवरी निर्धारित की गई थी. बुच ने को 2022 में सेबी के अध्यक्ष पद के लिए नियुक्त किया गया था. इसी के साथ बुच सेबी की नेतृत्व करने वाली पहली महिला बनी थी. नियुक्ति के बाद उन्होंने लगातार दो कार्यकाल को पूरा किया. वहीं तुहिन कांता पांडे की बात करें तो इस पद पर आने से पहले उन्होंने कई भारतीय नौकरशाही के प्रमुख पदों को संभाला है. 2025 में ही उन्हें वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के सचिव पद पर नियुक्त किया था. इसके अलावा उन्होंने  निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM), सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) और कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं है.

सेबी अध्यक्ष के पास दो विकल्प

सेबी के विज्ञापन के मुताबिक सेबी अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष के लिए होता है लेकिन इसे पांच साल के लिए विस्तरित किया जा सकता है. हालांकि इसके लिए कुछ खास शर्त भी रखे गए हैं. जिसमें सबसे खास यह है कि नियुक्त व्यक्ति 65 वर्ष की आयु पूरे होने के बाद पद पर नहीं रह सकता है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष के पास पारिश्रमिक प्राप्त करने के लिए दो विकल्प हैं. पहला विकल्प भारत सरकार के सचिव के बराबर वेतन और भत्ते के समान होंगे. इसके अलावा 5,62,500 रुपये का एक निश्चित मासिक वेतन का विकल्प है. जिसमें सरकार द्वारा प्रदान किया गया घर और कार जैसे अतिरिक्त भत्ते शामिल नहीं हैं.

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