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रूस से तेल आयात पर मिली अमेरिकी छूट की ‘डेडलाइन’ करीब, अब क्या करेगा भारत?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव और वैश्विक तेल संकट के बीच भारत ने रूस से तेल आयात पर मिली अमेरिकी छूट बढ़ाने की मांग की है. इस बीच केंद्र सरकार ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि फिलहाल ईंधन को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है.

Calendar Last Updated : 15 May 2026, 08:35 AM IST
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नई दिल्ली: दुनिया भर में तेल सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लगातार जारी तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है. रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद पर लगी समयसीमा खत्म होने से पहले भारत ने अमेरिका से प्रतिबंधों में मिली छूट को आगे बढ़ाने की मांग की है. माना जा रहा है कि अगर यह छूट खत्म होती है तो इसका असर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है. ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है, भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता.

भारत ने अमेरिका से कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए रूसी तेल आयात पर दी गई छूट को आगे बढ़ाया जाए. अमेरिका ने पहली बार मार्च में यह विशेष अनुमति दी थी, ताकि वैश्विक बाजार में तेल की कमी न हो और कीमतों पर नियंत्रण बना रहे. फिलहाल यह छूट 16 मई की रात तक लागू है. हालांकि रूस के तेल पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं है, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका लगातार भारत सहित कई देशों पर दबाव बना रहा है कि वे रूस से होने वाली खरीद कम करें. इसके बावजूद भारत का कहना है कि देश की ऊर्जा जरूरतें और स्थिर सप्लाई सबसे अहम हैं.

मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ी चिंता

28 फरवरी से मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव ने दुनिया भर में तेल सप्लाई को प्रभावित किया है. खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट के कारण कई देशों की चिंता बढ़ गई है. भारत ने साफ कहा है कि अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. सरकार का मानना है कि ऐसे समय में सस्ती और स्थिर तेल सप्लाई बनाए रखना बेहद जरूरी है. इसी वजह से भारत रूस से तेल खरीद जारी रखने के पक्ष में है.

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रूसी तेल आयात

छूट खत्म होने से पहले भारतीय रिफाइनरी कंपनियां तेजी से रूसी तेल खरीद रही हैं. आंकड़ों के अनुसार मई महीने में रूस से कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड 23 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है. पूरे महीने का औसत करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है. हालांकि भारत ने उन रूसी एलएनजी कार्गो को लेने से इनकार कर दिया है जो अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आते हैं. बताया जा रहा है कि इसी कारण रूस से जुड़ा एक एलएनजी शिपमेंट फिलहाल सिंगापुर के पास रुका हुआ है.

रूस और भारत के बीच लगातार बातचीत

ऊर्जा सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत जारी है. हाल ही में रूस के उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन ने नई दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात की थी. माना जा रहा है कि जून में फिर दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है.

सरकार ने दिया भरोसा, ईंधन की कमी नहीं

केंद्र सरकार ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि फिलहाल ईंधन को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि भारत के पास इस समय 69 दिनों का एलएनजी और 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक सुरक्षित है. सरकार ने घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एलपीजी उत्पादन भी बढ़ा दिया है. पहले जहां रोजाना 36 हजार टन उत्पादन हो रहा था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 54 हजार टन कर दिया गया है. सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में भी देश में ईंधन सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है.

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