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Uttarkashi Tunnel Rescue: जानें क्या है "ड्रोन मैपिंग", रेस्क्यू ऑपरेशन में कैसे मिलेगी इससे मदद

Uttarkashi Tunnel Rescue: मौसम विभाग ने उत्तरकाशी में भारी बारिश और बर्फवारी की चेतावनी जारी की है. इसे देखते हुए बचाव कर्मियों द्वारा सुरंग में अंदर ड्रोन मैपिंग की गयी है.

Calendar Last Updated : 27 November 2023, 11:49 AM IST
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Uttarkashi Tunnel Rescue: उत्तरकशी के सिलक्यांरा सुरंग ढहने से उसमे फंसे 8 राज्यों के 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने की कवायद जारी है. रेस्क्यू ऑपरेशन के 16वे दिन भी अभी तक बचाव दल को कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी है. इसी बीच सुरंग के अंदर ड्रिलिंग कर रहे ऑगर मशीन के टूटने की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी रुकावट आयी थी. हालाँकि अब ऑगर मशीन के टूटे हस्सों को पाइप  से बाहर निकाल लिया गया है. लेकिन अब ऑगर मशीन के टूट जाने के बाद बचाव दल  सुरंग के ऊपर पहाड़ी पर वर्टिकल ड्रिलिंग कर रहे हैं. इसके साथ ही बचाव अभियान में जुटे सेना के जवानों ने सुरंग की ड्रोन के जरिए डिजिटल मैपिंग शुरू कर दी है. जानें क्या है ड्रोन मैपिंग 

जानें क्या होती है ड्रोन मैपिंग 

गौरतलब है कि हाई रिजोल्यूशन कैमरे से लैस ड्रोन संबंधित जगह की एरियल तस्वीर लेने के लिए और लेजर के जरिए लंबाई चौड़ाई, गहराई की मैपिंग कर 3D मैप बनाने के लिए डिजिटल ड्रोन मैपिंग की जाती है. इसके बाद इन तस्वीरों को फोटोग्राममेट्री के माध्यम से 3D मैप में तब्दील किया जाता है, जिसे  ऑर्थोमोजक कहा जाता है.

जानकारी के अनुसार, यह 3D मैपिंग सुरंग की से बिल्कुल मिलती-जुलती होगी, जिसकी वजह से बारिश और बर्फवारी के बाद अगर रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आती हैं तो ये सहायक साबित होगी. इसके अलावा इस 3D मैप को आसनी से दुनिया के किसी भी एक्सपर्ट को भेज कर उनसे बचाव और राहत अभियान से जुड़ी सलाह ली जा सकती है. 

कैसे मददगार साबित होगा ड्रोन मैपिंग 

दरअसल किसी भी जगह की 3D मैपिंग करने के लिए सबसे कारगर उपाय ड्रोन मैपिंग है. बता दें कि ,  सुरंग में ड्रिलिंग मशीन के बचे अवशेषों की वजह से ड्रिलिंग का काम बार-बार रुक रहा है. इसके साथ ही भारतीय मौसम विभाग ने उत्तरकाशी में सोमवार से भारी बारिश और बर्फबारी को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है. बारिश की वजह से पहाड़ी सुरंग के आस-पास की पहाड़ी मिट्टी के धसने की सम्भावना जताई जा रही है. इतना ही नहीं, अगर मिट्टी धंसने की वजह से  सुरंग के अंदर बिछाई गई 80 सेंटीमीटर रेडियस की पाइप भी जिस आधार पर टिकी है, उसमें दरार आने की सम्भावना जताई जा रही है. 

इसलिए भारतीय सेना के बचाव दल द्वारा ड्रोन से  3D मैपिंग की गयी है.  ड्रोन मैपिंग के जरिये सुरंग के बिल्कुल अंदर तक मौजूदा जगहों की लंबाई, चौड़ाई, गहराई तथा अन्य स्ट्रक्चर की सटीक डिजिटल कॉपी उपलब्ध होगी , जो सुरंग में मजदूरों तक पहुंचने के लिए अचूक रणनीति बनाने में अहम् भूमिका निभाएगी. 
 

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