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वक्फ संशोधन अधिनियम पास या फेल? कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में आद वक्फ (संशोधन) अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की जाएगी. इस याचिका की सुनावाई मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ करेगी. जिसमें न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन भी शामिल हैं.

Calendar Last Updated : 16 April 2025, 06:41 AM IST
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SC to hear pleas on Waqf Amendment Act: सुप्रीम कोर्ट में आज यानी बुधवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की जाएगी. जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना करेंगे. जिसमें तीन न्यायाधीशों की पीठ होगी. इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश के साथ-साथ न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन शामिल हैं. 

संजीव खन्ना की पीठ ने अब तक इस मामले से संबंधित 10 याचिकाओं को विचार के लिए सूचीबद्ध किया है. वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को संसद से 4 अप्रैल को पारित कर दिया गया था, इसके बाद 5 अप्रैल को राष्ट्रपति की स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है. इसके बाद केंद्र सरकार ने अधिनियम के प्रवर्तन को अधिसूचित किया, जिससे यह 8 अप्रैल से प्रभावी हो गया.

इन लोगों ने दायर की याचिका

अदालत ने AIMIM  सांसद असदुद्दीन ओवैसी, आप नेता अमानतुल्लाह खान, एसोसिएशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स, अरशद मदनी, समस्त केरल जमीयतुल उलेमा, अंजुम कादरी, तैय्यब खान सलमानी, मोहम्मद शफी, मोहम्मद फजलुर्रहीम और राजद नेता मनोज कुमार झा द्वारा दायर याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है. सुप्रीम कोर्ट में कई नई याचिकाएं भी दायर की गई हैं, लेकिन उन्हें अभी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है. दायर की गई इस याचिका में याचिकाकर्ताओं की लिस्ट में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का नाम शामिल है. 

केंद्र ने दाखिल किया कैविएट

वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और तमिलगा वेत्री कझगम प्रमुख और अभिनेता से नेता बने विजय ने भी इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है. इसके अलावा, अधिवक्ता हरि शंकर जैन और मणि मुंजाल नामक याचिकाकर्ता ने एक अलग याचिका प्रस्तुत की है. जिसमें तर्क दिया गया है कि संशोधित कानून के कई प्रावधान गैर-मुसलमानों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं. जवाब में, भारत के मुख्य न्यायाधीश ने याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की है. हालांकि केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल किया गया है. इसका मतलब होता है कि अदालत कोई भी फैसला सुनाने से पहले उसका पक्ष भी सुन लें. इसके बाद आज सबकी नजर अदालत की ओर है. 

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