नरेगा में बड़ा बदलाव: अब अपने घर में काम करने पर भी मिलेगी पूरी मज़दूरी, CM मान ने खोला खजाना

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मनरेगा योजना में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए एक क्रांतिकारी फैसला लिया है. अब मजदूरों को सिर्फ सरकारी प्रोजेक्ट्स पर ही नहीं, बल्कि अपने घर पर काम करने पर भी पूरी मज़दूरी मिलेगी.

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Courtesy: bharatvarsh

चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मनरेगा योजना में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए एक क्रांतिकारी फैसला लिया है। अब मजदूरों को सिर्फ सरकारी प्रोजेक्ट्स पर ही नहीं, बल्कि अपने घर पर काम करने पर भी पूरी मज़दूरी मिलेगी।

जिन मज़दूरों ने नरेगा के तहत रजिस्ट्रेशन करवाया है और जिनके पास नरेगा कार्ड है, उन्हें अब अपने घर में काम करने का भी पूरा लाभ मिलेगा. यह योजना गरीब परिवारों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी. अगर कोई मज़दूर अपने घर पर 90 दिन काम करता है, तो उसका पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा और उसे 31,140 रुपये की राशि सीधे खाते में ट्रांसफर की जाएगी.

नरेगा योजना के तहत अब कई सुविधाएं शामिल की गई है. इस योजना में ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण, तालाब निर्माण, नहर की सफाई, वृक्षारोपण और जल संरक्षण के काम शामिल है. इसके अलावा किसानों को अपने खेतों में मेड़बंदी, कुआं खुदाई और सिंचाई की सुविधाएं बनाने के लिए भी मज़दूरी मिलेगी.

योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब मज़दूर अपने घर पर शौचालय निर्माण, पक्का फर्श बनाना, छत की मरम्मत और अन्य घरेलू निर्माण कार्य करके भी मज़दूरी प्राप्त कर सकेंगे. इससे गरीब परिवारों को दोहरा फायदा होगा - एक तरफ उनके घर का विकास होगा, दूसरी तरफ उन्हें रोज़गार भी मिलेगा.

नरेगा के तहत प्रत्येक मज़दूर को 346 रुपये प्रति दिन की दर से मज़दूरी दी जाती है. एक वित्तीय वर्ष में हर परिवार को कम से कम 100 दिन का रोजगार की गारंटी दी जाती है. अगर किसी मजदूर को 15 दिन के अंदर काम नहीं मिलता है, तो उसे बेरोज़गारी भत्ता भी दिया जाता है.

योजना के तहत महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है. कुल कार्यबल का कम से कम 33 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित है. काम के दौरान कार्यस्थल पर पीने के पानी, छाया और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा भी अनिवार्य है. छोटे बच्चों वाली महिलाओं के लिए क्रेच की व्यवस्था भी की जाती है.

मजदूरों का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते या डाकघर खाते में किया जाता है, जिससे बिचौलियों का खात्मा होता है. काम शुरू होने के 15 दिनों के अंदर मजदूरी का भुगतान करना जरूरी है. अगर देरी होती है तो मजदूर को मुआवजे के रूप में अतिरिक्त राशि भी दी जाती है.

नरेगा योजना में रजिस्ट्रेशन बिल्कुल मुफ्त है. कोई भी 18 वर्ष से अधिक उम्र का व्यक्ति जो ग्रामीण क्षेत्र में रहता है और अकुशल शारीरिक श्रम करने को तैयार है, वह इस योजना के लिए आवेदन कर सकता है. रजिस्ट्रेशन के 15 दिनों के अंदर जॉब कार्ड जारी किया जाता है.

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह फैसला गरीब मज़दूरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा. उन्होंने सभी पात्र मज़दूरों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द नरेगा के तहत रजिस्ट्रेशन करवाएं और इस योजना का पूरा लाभ उठाएं. इस योजना से न केवल रोज़गार मिलेगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास भी होगा.

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