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Chaitra Navratri 2026 Day 5: स्कंदमाता की कृपा से मिलेगी असीम शक्ति! पहनें सफेद रंग, जपें मंत्र

आज नवरात्रि का पांचवा दिन है. इस दिन मां के स्कंदमाता रूप की पूजा होती है. तो आईए जानते हैं कौन हैं स्कंदमाता, शुभ मुहूर्त, रंग, पूजा की विधि और मंत्र से जुड़ी सभी जानकारी

Calendar Last Updated : 23 March 2026, 08:05 AM IST
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नई दिल्ली: नौ दिनों तक चलने वाला हिंदू त्योहार चैत्र नवरात्रि 19 मार्च, 2026 को शुरू हो चुका है. और 29 मार्च, 2026 को राम नवमी मनाया जाएगा. इसके साथ ही मां दुर्गा की विदाई हो जाएगी. इन नौ दिनों में देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है. आज नवरात्रि का पांचवा दिन है. इस दिन मां के स्कंदमाता रूप की पूजा होती है. तो आईए जानते हैं कौन हैं स्कंदमाता, शुभ मुहूर्त, रंग, पूजा की विधि और मंत्र से जुड़ी सभी जानकारी-

जानिए कौन हैं मां स्कंदमाता?

देवी पार्वती को भगवान स्कंद, जोकि भगवान कार्तिकेय के नाम से जाने जाते हैं, की माता बनीं, माता होने के कारण स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है. वे देवताओं की सेना की सेनापति हैं. उन्हें सिंह पर बैठे हुए, अपने पुत्र को गोद में लिए हुए दर्शाया जाता है, जो शक्ति, संरक्षण और मातृत्व प्रेम का प्रतीक है. चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन माता स्कंदमाता की पूजा और उनसे शक्ति, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति के लिए आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु समर्पित है.

देवी की चार भुजाएं हैं और सिंह उनका वाहन है. उन्हें दो कमल धारण किए हुए देखा जा सकता है, और उनका एक हाथ हमेशा आशीर्वाद देने की मुद्रा में रहता है. दूसरे हाथ से वे भगवान कार्तिकेय को अपनी गोद में लिए रहती हैं. देवी स्कंदमाता को पद्मासन के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है कमल पर विराजमान होना.

चैत्र नवरात्रि 2026 दिन 5: शुभ मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, स्कंदमाता की पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातःकाल 04:48 बजे से प्रातः 05:35 बजे तक है. इसके बाद सुबह 05:12 AM से 06:23 AM, दोपहर में 12:04 बजे से 12:53 बजे, दोपहर 02:31 बजे से 03:19 बजे, शाम 06:33 बजे से शाम 06:57 बजे और शाम 06:35 बजे से 07:45 बजे तक भक्त मां की अराधना कर सकते हैं. 

आज का रंग

इस दिन देवी की कृपा पाने और आंतरिक शांति एवं सुरक्षा का अनुभव करने के लिए सफेद रंग पहनें. सफेद रंग पवित्रता और मासूमियत का प्रतीक है. 

पूजा की विधि

1. सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई करें और फिर साफ कपड़े पहनें. 

2. दुर्गा मत की मूर्ति के सामने देसी घी से दीया जलाएं, सिंदूर, फूल या माला अर्पित करें. 

3. उन्हें मीठा पान, सुपारी, लौंग, इलाइची, पांच अलग-अलग फल और मिठाइयां चढ़ानी चाहिए. 

4.दुर्गा सप्तशती पाठ और दुर्गा चालीसा का पाठ करें. 

5. भोग प्रसाद और दूध से बनी चीजें जैसे दही और मखाना खीर चढ़ाएं. 

6. भोग प्रसाद चढ़ाने के बाद आरती अवश्य करें. 

7. सभी पूजा अनुष्ठानों को पूरा करने के बाद व्रत तोड़ें और सात्विक भोजन करें. 

मां स्कंदमाता के लिए शक्तिशाली मंत्र

ॐ देवी स्कंदमातायै नमः॥

ॐ देवी स्कंदमातायै नमः॥

सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित् करद्वया.

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

सिंहासनगता नित्यं पद्मानचिता कराद्वय.

शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥

या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता.

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

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