Chaitra Navratri Day 4: मां कुष्मांडा की पूजा से दूर होंगी सभी परेशानियां! सुबह 4:55 से शाम 8:11 तक शुभ मुहूर्त, जानें पूजा की विधि

आज नवरात्रि का चौथा दिन है, जिसमें मां कुष्मांडा की जाएगी. मां कुष्मांडा को इस ब्रह्मांड की सृष्टिकर्ता और ऊर्जा एवं सकारात्मकता का स्रोत माना जाता है.

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Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि नौ दिनों तक मनाया जाने वाला एक विशेष हिंदू त्योहार है, जिसमें देवी दुर्गा के अनेकों स्वरूपों की पूजा की जाती है. इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से हुई है. आज नवरात्रि का चौथा दिन है, जिसमें मां कुष्मांडा की जाएगी. मां कुष्मांडा को इस ब्रह्मांड की सृष्टिकर्ता और ऊर्जा एवं सकारात्मकता का स्रोत माना जाता है.

कौन हैं मां कुष्मांडा?

द्रिक पंचांग के अनुसार, मां कूष्मांडा देवी दुर्गा का चौथा रूप हैं. ऐसा माना जाता है कि उन्होंने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की. उनका नाम तीन शब्दों से मिलकर बना है – 'कु' (छोटा), 'उष्मा' (गर्मी) और 'अंडा' (ब्रह्मांडीय अंडा), जो मिलकर सृष्टि की शुरुआत का प्रतीक हैं.

उन्हें सूर्य से जोड़ा जाता है और माना जाता है कि वे ऊर्जा, स्वास्थ्य और शक्ति प्रदान करती हैं. मां कूष्मांडा को आमतौर पर आठ हाथों के साथ दर्शाया जाता है जिनमें हथियार, माला और अमृत का पात्र जैसी विभिन्न वस्तुएं होती हैं, जो शक्ति, ज्ञान और आशीर्वाद का प्रतीक हैं.

पूजा का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि में मां कुष्मांडा के पूजन का समय प्रातः काल सुबह 04:55 बजे से 05:43 बजे तक है. इसके बाद दोपहर में 12:09 बजे से 12:57 बजे और शाम में 06:42 बजे से रात के 08:11 बजे तक आप मां की अराधना कर सकते हैं. 

आज का रंग

द्रिक पंचांग के अनुसार, नवरात्रि के चौथे दिन का रंग नारंगी (ऑरेंज) होता है. नारंगी रंग पहनना ऊर्जा, सकारात्मकता और उत्साह का प्रतीक है.

पूजा की विधि 

सुबह जल्दी उठो, घर साफ करो और साफ कपड़े पहनो.

मां कुष्मांडा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें और घी से दीया जलाएं.

फूल, कुमकुम और माला अर्पित करें.

फल, मिठाई, पान, सुपारी और सूखे मेवे जैसी चीजें पेश करें.

दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें.

खीर, दही और मखाना जैसे प्रसाद का भोग लगाएं.

श्रद्धापूर्वक आरती करें.

पूजा के बाद, सादा (सात्विक) भोजन करके अपना व्रत तोड़ें.

इन सबके बाद आप मां के इस मंत्र का उच्चारण करें जिससे मां प्रसन्न होंगी.  

मंत्र

॥ देवी कुष्मंदयै नमः॥

सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च.
दधाना हस्तपद्मभ्यं कूष्मांडा शुभदास्तु मे॥

या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्मांडा रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

इन मंत्रों का जाप करने से शक्ति, सकारात्मकता और आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद मिलती है.

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