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कब और कैसे मनाएं मकर संक्रांति? जानें स्नान और दान के शुभ मुहूर्त

Makar Sankranti 2025: वैदिक पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति 2025 में 14 जनवरी यानी मंगलवार को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान सूर्य सुबह 9 बजकर 3 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. इस दिन गंगा स्नान का और दान करने का शुभ समय भी बताया गया है.

Calendar Last Updated : 15 December 2024, 12:00 PM IST
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Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे हर साल जनवरी महीने में धूमधाम से मनाया जाता है. यह त्योहार सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है और नई फसल के आगमन का प्रतीक भी है.

आइए साल 2025 में मकर संक्रांति की तारीख, शुभ मुहूर्त और इस दिन के विशेष महत्व के बारे में जानते हैं. जिससे की आप अभी से ही अपनी पूरी प्लानिंग कर पाए. 

कब और कैसे मनाएं मकर संक्रांति

वैदिक पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति 2025 में 14 जनवरी यानी मंगलवार को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान सूर्य सुबह 9 बजकर 3 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. इस दिन गंगा स्नान का और दान करने का शुभ समय भी बताया गया है. जानकारी के मुताबिक  यह सुबह 9:03 बजे से शुरू होकर शाम 5:46 बजे तक रहेगा. इस दौरान स्नान और दान करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है.  पुण्य काल की अवधि: 8 घंटे 42 मिनट तक रहेगी. वहीं महा पुण्य काल सुबह 9:03 बजे से शुरू होकर 10:48 बजे पर समाप्त होगा.  महा पुण्य काल की अवधि1 घंटा 45 मिनट  रहने वाली है. 

मकर संक्रांति का महत्व  

मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य की पूजा का विशेष महत्व है. इस दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर बढ़ते हैं, जिससे दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं. ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है.  इस दिन गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. साथ ही दान करने की परंपरा भी इस त्योहार को और खास बनाती है. इस खास दिन पर दान में तिल, गुड़, कंबल, अन्न और वस्त्र का विशेष महत्व माना जाता है.  जो व्यक्ति पुण्य काल या महा पुण्य काल में स्नान और दान करता है, उसे स्वास्थ्य, समृद्धि और आध्यात्मिक लाभ की प्राप्ति होती है.  यह त्योहार किसानों के लिए बेहद ही प्रमुख त्योहार में जाना जाता है. यह त्योहार नई फसल के आगमन का उत्सव भी कहा जाता है. इस दिन किसान अपनी फसलों के कटने और आने वाले समृद्धि के दिनों का स्वागत करते हैं.  
 

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