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कच्चे तेल के दाम गिरे, फिर भी पेट्रोल-डीजल बेचने पर कंपनियों को होगा नुकसान!

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर आर्थिक दबाव बना हुआ है. ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर नुकसान उठाना पड़ सकता है.

Calendar Last Updated : 22 June 2026, 12:29 PM IST
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नई दिल्ली: देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बावजूद तेल कंपनियों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार पहले ही एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर चुकी है, लेकिन इसके बाद भी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर आर्थिक दबाव बना हुआ है। ऐसे में आने वाले महीनों में ईंधन बाजार की स्थिति कैसी रहेगी, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा था और कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर गई थीं, तब कई देशों में पेट्रोल और डीजल महंगे हो गए थे। उस समय केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। हालांकि बाद में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम काफी नीचे आ गए। इसके बावजूद तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को अभी भी लागत और बिक्री मूल्य के बीच अंतर का सामना करना पड़ रहा है।

पहली तिमाही में बढ़ सकता है दबाव

ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और एचपीसीएल जैसी प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत चुनौतीपूर्ण रह सकती है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि FY27 की पहली तिमाही के दौरान पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। पेट्रोल पर लगभग 7 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 10 रुपये प्रति लीटर तक की अंडर-रिकवरी की आशंका जताई गई है। इसका सीधा असर कंपनियों की कमाई और मुनाफे पर पड़ सकता है।भारतीय संस्कृति

एक्साइज ड्यूटी से जुड़ा जोखिम भी बरकरार

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार द्वारा पहले दी गई एक्साइज ड्यूटी में कटौती को भविष्य में चरणबद्ध तरीके से वापस लिया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो तेल कंपनियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। जानकारों के अनुसार एक्साइज ड्यूटी में कमी के कारण सरकार को हर साल 1.7 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कच्चे तेल में राहत, लेकिन पूरी तरह नहीं टला खतरा

हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीद के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। इससे तेल कंपनियों को कुछ राहत जरूर मिली है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत लंबे समय तक बनी रहे, इसकी कोई गारंटी नहीं है। कई देश अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार(SPR) को दोबारा भरने की तैयारी कर सकते हैं। इससे वैश्विक मांग बढ़ सकती है और कच्चे तेल की कीमतें फिर ऊपर जा सकती हैं।

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