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कच्चे तेल में 3% से ज्यादा गिरावट, पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी; तेल कंपनियों को मिल सकती है बड़ी राहत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 3% से ज्यादा की गिरावट के बाद 23 जून को पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी कर दिए गए हैं. आने वाले समय में तेल कंपनियों की स्थिति मजबूत हो सकती है.

Calendar Last Updated : 23 June 2026, 12:00 PM IST
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नई दिल्ली: देशभर में 23 जून 2026 के लिए पेट्रोल और डीजल की ताजा कीमतें जारी कर दी गई हैं. राहत की बात यह है कि सरकारी तेल कंपनियों ने आज भी ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 3 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आने वाले दिनों में तेल कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है

अमेरिका-ईरान बातचीत का असर

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दामों में नरमी देखने को मिली है. अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत के बाद तेल आपूर्ति बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. इसी वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 78 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति बनी रहती है तो आगे कीमतों पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है.

महानगरों में पेट्रोल-डीजल के भाव

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर है.  वहीं कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है. चेन्नई में पेट्रोल 108.01 रुपये और डीजल 99.66 रुपये प्रति लीटर के भाव पर उपलब्ध है.

मई में चार बार बढ़े थे दाम

पिछले महीने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार चार बार बढ़ोतरी की गई थी. मई के दौरान तेल कंपनियों ने 11 दिनों के भीतर कई बार दाम बढ़ाए, जिससे पेट्रोल और डीजल लगभग 8 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो गए थे. इसके बाद से कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.

तेल कंपनियों को मिल रही राहत

पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, तेल कंपनियों का घाटा पहले की तुलना में काफी कम हो गया है. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के चलते कंपनियों की लागत कम हुई है, जिससे उनके मुनाफे में सुधार की संभावना बढ़ी है.

यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती हैं तो सरकारी तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति और मजबूत हो सकती है. इसका फायदा भविष्य में उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है. फिलहाल वाहन चालकों को अपने शहर के ताजा रेट देखकर ही ईंधन भरवाने की सलाह दी जा रही है

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