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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बावजूद अब एक बार फिर बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिशें तेज होती दिखाई दे रही हैं. हालिया सैन्य तनाव के बाद दोनों देशों के रिश्तों में भले ही तल्खी बनी हुई हो, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर संवाद पूरी तरह बंद नहीं हुआ है. इसी क्रम में कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच तकनीकी स्तर की वार्ता का अगला दौर प्रस्तावित माना जा रहा है. हालांकि अभी तक इस बैठक की आधिकारिक तारीख तय नहीं हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता होती है तो इससे क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की पहल पर मंगलवार को दोहा में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत होने वाली है. उन्होंने इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर भी जानकारी साझा की. हालांकि ईरान ने इस दावे से साफ इनकार किया है. ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि फिलहाल इस सप्ताह किसी तकनीकी बैठक का कोई कार्यक्रम तय नहीं है. उनके मुताबिक, कतर के साथ केवल कुछ जरूरी मुद्दों पर चर्चा चल रही है और दूसरे पक्ष की ओर से किए गए वादों को लागू कराने को लेकर विचार-विमर्श जारी है.
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कई मध्यस्थ देश अमेरिका और ईरान के बीच संवाद बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े किसी भी संभावित विवाद को बढ़ने से रोकने के लिए लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है. इसी कारण दोनों देशों ने फिलहाल एक-दूसरे पर सीधे हमले नहीं किए हैं. माना जा रहा है कि बातचीत की संभावनाओं को बनाए रखने के लिए दोनों पक्ष फिलहाल संयम बरत रहे हैं.
सूत्रों के अनुसार, यदि दोहा में प्रस्तावित बैठक होती है तो उसका मुख्य विषय होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और संचालन रहेगा. इसके अलावा क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है. गौरतलब है कि 17 जून को दोनों देशों के बीच 14 बिंदुओं वाले एक प्रारंभिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर सहमति बनी थी. इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने सैन्य हमले रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने और अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत बातचीत जारी रखने का फैसला किया था.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने दावा किया है कि कतर में रोकी गई 12 अरब डॉलर की राशि में से छह अरब डॉलर जल्द ही ईरान को जारी किए जाएंगे. वहीं अमेरिका ने इस दावे को सही नहीं माना है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल ईरान की किसी भी फ्रीज संपत्ति को जारी नहीं किया गया है. दूसरी ओर कतर ने भी इस तरह के किसी फंड ट्रांसफर की पुष्टि नहीं की है. ऐसे में इस मुद्दे पर दोनों देशों के दावे अलग-अलग नजर आ रहे हैं.
हाल ही में कतर के एक तेल टैंकर पर हुए हमले और उसमें एक नागरिक की मौत के बाद क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. इसी वजह से कतर ने सुझाव दिया है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्पष्ट सहमति नहीं बन जाती, तब तक इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए. इसके अलावा पर्यटन नौकाओं, मछली पकड़ने वाली नावों, जेट स्की और अन्य व्यावसायिक जल परिवहन सेवाओं पर भी अस्थायी रोक लगाने की सिफारिश की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके.
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकाफ और जेरेड कुशनर इस सप्ताह दोहा जाकर उच्चस्तरीय वार्ता में हिस्सा ले सकते हैं. उधर, ईरान ने जानकारी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ बनाई गई संयुक्त समिति की पहली बैठक सोमवार को मस्कट में होगी. इस बैठक में समुद्री सुरक्षा और दोनों देशों के बीच समन्वय बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी.
व्हाइट हाउस के अनुसार, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और विशेष दूत स्टीव विटकाफ सोमवार को अमेरिकी संसद के दोनों सदनों के सदस्यों को ईरान के साथ हुए समझौते और आगे की रणनीति की जानकारी देंगे. बैठक में समझौते के विभिन्न पहलुओं, क्षेत्रीय सुरक्षा, कूटनीतिक प्रयासों और भविष्य की संभावित योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. माना जा रहा है कि यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं.