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बांग्लादेश में बड़ा फेरबदल, नोटों से मुजीबुर रहमान के नाम हटाने के बाद उनके 'स्वतंत्रता सेनानी' का दर्जा भी खत्म

बांग्लादेश में स्वतंत्रता सेना का अर्थ बदल दिया गया है. जिसके मुताबिक शेख मुजीबुर रहमान को स्वतंत्रता सेनानी के लिस्ट से हटा दिया गया है. वहीं उनके फोटों को बांग्लादेशी नोटों से पहले ही हटा दिया गया था.

Calendar Last Updated : 04 June 2025, 11:55 AM IST
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Mujibur rahman: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने मंगलवार को एक नया अध्यादेश जारी किया. इसमें 'स्वतंत्रता सेनानी' (बीर मुक्तिजोधा) की परिभाषा बदल दी गई. इस बदलाव से बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान और 1971 के मुक्ति संग्राम के 400 से अधिक नेताओं से यह दर्जा छिन गया. 

कानून मंत्रालय ने कहा कि अब सैयद नज़रुल इस्लाम, ताजुद्दीन अहमद, एम मंसूर अली और एएचएम कमरुज्जमां जैसे नेता स्वतंत्रता सेनानी नहीं माने जाएंगे. उन्हें 'मुक्ति संग्राम के सहयोगी' के रूप में वर्गीकृत किया गया है.

स्वतंत्रता सेनानी की नई परिभाषा

बांग्लादेश के नए नियम के मुताबिक स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा केवल उन्हें ही दिया जाएगा जिसने युद्ध में हिस्सा लिया हो. इसमें वे लोग शामिल हैं जिन्होंने बांग्लादेश में प्रशिक्षण लिया या भारत में प्रशिक्षण शिविरों में गए. इनका मकसद पाकिस्तानी सेना के खिलाफ युद्ध करना था.

स्वतंत्रता सेनानी बनने के लिए व्यक्ति को युद्ध के समय सरकार द्वारा तय न्यूनतम आयु का होना जरूरी है. साथ ही, उसे सशस्त्र बलों का सदस्य या युद्ध में सक्रिय हिस्सेदार होना चाहिए. अध्यादेश में स्पष्ट किया गया है कि युद्ध के दौरान प्रताड़ित महिलाओं (बीरंगना) को स्वतंत्रता सेनानी माना जाएगा. इसके अलावा, फील्ड अस्पतालों में घायल लड़ाकों का इलाज करने वाले डॉक्टर, नर्स और चिकित्सा कर्मियों को भी यह दर्जा मिलेगा. यह कदम उन लोगों को सम्मान देता है, जिन्होंने युद्ध में सीधे योगदान दिया.

शेख मुजीबुर रहमान का फोटो हटा

यह पहला मौका नहीं है जब अंतरिम सरकार ने शेख मुजीबुर रहमान के योगदान को कम करने की कोशिश की. पिछले साल शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से यह सिलसिला शुरू हुआ. सोमवार को बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक ने नए बैंक नोट जारी करने की घोषणा की. इनमें शेख मुजीबुर की तस्वीर की जगह प्राकृतिक परिदृश्य और ऐतिहासिक स्थल होंगे. पहले सभी नोटों पर शेख मुजीबुर का चित्र होता था. वे 1971 में बांग्लादेश को आजादी दिलाने वाले नेता थे.

उनकी 1975 में हत्या कर दी गई थी. केंद्रीय बैंक ने कहा कि नए नोट पुराने नोटों और सिक्कों के साथ प्रचलन में रहेंगे. पुराने नोटों पर अभी भी शेख मुजीबुर की तस्वीर होगी. लेकिन नए नोटों में बदलाव से देश के इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश साफ दिखती है. इस अध्यादेश ने बांग्लादेश में नई बहस छेड़ दी है. कई लोग इसे शेख मुजीबुर और अन्य नेताओं के योगदान को कम करने की कोशिश मान रहे हैं. अंतरिम सरकार के इस कदम पर जनता और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया का इंतजार है.  
 

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