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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में शांति बहाली की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. ईरान समर्थित चरमपंथी संगठन हिजबुल्लाह ने लेबनान के लिए प्रस्तावित नए युद्धविराम समझौते को मानने से साफ इनकार कर दिया है.
इसके तुरंत बाद इजरायल ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि उसकी सेना किसी भी कीमत पर दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी. इन दोनों घटनाक्रमों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन राजनयिक प्रयासों को गंभीर संकट में डाल दिया है जिसके तहत वह लेबनान और ईरान मोर्चे पर जारी तनाव को खत्म करना चाहते थे.
अमेरिका की मध्यस्थता वाला फॉर्मूला फेल
अमेरिकी प्रशासन की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान सरकार के बीच एक व्यापक शांति समझौता तैयार किया गया था. इस ब्लूप्रिंट के तहत दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह की सभी सैन्य गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और उस रणनीतिक क्षेत्र का नियंत्रण पूरी तरह से लेबनानी सेना को सौंपने की योजना थी.
प्रस्ताव को खारिज किया
हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया. संगठन का तर्क है कि वे इस बातचीत की मेज पर शामिल ही नहीं थे इसलिए लेबनान सरकार द्वारा उनकी पीठ पीछे लिया गया कोई भी फैसला उन्हें स्वीकार्य नहीं है. हिजबुल्लाह ने संकेत दिया है कि वह सीमाई इलाकों में अपनी सैन्य मौजूदगी और इजरायल के खिलाफ रॉकेट हमले जारी रखेगा.
इजरायल का कड़ा रुख
हिजबुल्लाह के इस अड़ियल रुख के बाद इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने भी कड़ा बयान जारी किया है. उन्होंने साफ किया कि इजरायली डिफेंस फोर्सेज दक्षिणी लेबनान में अपने मोर्चे पर डटी रहेगी और वहां जारी जमीनी व हवाई सैन्य अभियान रुकने वाले नहीं हैं. ज्ञात हो कि इजरायल ने मार्च महीने में ईरान के साथ सीधे संघर्ष के समानांतर लेबनान में भी बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की थी.
ईरान की चेतावनी से बढ़ीं मुश्किलें
इस कूटनीतिक गतिरोध के बाद क्षेत्र में युद्ध की आग और भड़कने की आशंका है. ईरान पहले ही वाशिंगटन को चेतावनी दे चुका है कि अमेरिका के साथ किसी भी परमाणु या रणनीतिक समझौते के लिए लेबनान में युद्धविराम पहली और अनिवार्य शर्त है. तेहरान ने हाल ही में यह भी संकेत दिया है कि यदि इजरायल ने बेरूत और दक्षिणी लेबनान पर बमबारी बंद नहीं की तो वह इस युद्ध में सीधे तौर पर हस्तक्षेप कर सकता है.
लेबनान बन रहा रोड़ा
डोनाल्ड ट्रंप इस समय ईरान के साथ एक बड़ा समझौता करना चाहते हैं, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक व्यापार के लिए पूरी तरह सुरक्षित खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त शर्तें तय करना शामिल है. लेकिन लेबनान का यह मोर्चा अब ट्रंप की पूरी विदेश नीति के लिए सबसे बड़ा रोड़ा बन गया है.
जमीनी हालात की बात करें तो खाड़ी क्षेत्र में तनाव केवल लेबनान तक सीमित नहीं है. इस सप्ताह गाजा, उत्तरी इजरायल और कुवैत एयरपोर्ट पर हुए मिसाइल हमलों ने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया है. अमेरिकी घोषणाओं के बावजूद जमीन पर बारूद थमने का नाम नहीं ले रहा है.