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नई दिल्ली: समुद्र में होने वाली जंग अब पहले जैसी नहीं रहने वाली. आधुनिक तकनीक ने युद्ध का तरीका तेजी से बदल दिया है और इसी बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल एक नया मानवरहित सी-ड्रोन बनकर सामने आया है. दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ने पहली बार युद्ध अभियान में इस विशेष समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल किया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे चलाने के लिए किसी पायलट की जरूरत नहीं होती और यह लंबी दूरी तय करते हुए सीधे अपने लक्ष्य पर हमला करने में सक्षम माना जाता है. यही वजह है कि इसे भविष्य की नौसैनिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है.
बताया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना ने अपने उन्नत समुद्री ड्रोन को युद्ध अभियान में शामिल किया है. यह एक मानवरहित सतही पोत (USV) है, जिसे विशेष रूप से दुश्मन के समुद्री ठिकानों और जहाजों पर हमला करने के लिए तैयार किया गया है. इसकी बनावट ऐसी रखी गई है कि यह समुद्र की सतह के बेहद करीब चलते हुए आगे बढ़ता है, जिससे इसे सामान्य रडार सिस्टम से पहचानना आसान नहीं होता. रिपोर्टों के अनुसार, इस तकनीक का उद्देश्य दुश्मन के महत्वपूर्ण नौसैनिक ठिकानों को कम लागत में और बिना सैनिकों की जान जोखिम में डाले निशाना बनाना है. इसी कारण सैन्य विशेषज्ञ इसे आधुनिक समुद्री युद्ध में बड़ा बदलाव मान रहे हैं.
इस सी-ड्रोन की सबसे बड़ी ताकत इसकी लंबी दूरी तक संचालन क्षमता है. बताया जाता है कि यह करीब 1,850 किलोमीटर तक अभियान चला सकता है. इसकी अधिकतम रफ्तार लगभग 75 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है, जिससे यह कम समय में लक्ष्य के करीब पहुंच सकता है. इसके अलावा इसमें लगभग 453 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जाने की क्षमता होने का दावा किया गया है. इसे मुख्य रूप से ऐसे मिशनों के लिए तैयार किया गया है, जहां ड्रोन सीधे लक्ष्य से टकराकर हमला करता है. इसी वजह से इसे कामिकाज़े शैली का समुद्री ड्रोन भी कहा जाता है.
इस ड्रोन की डिजाइन इसे पारंपरिक हथियारों से अलग बनाती है. यह समुद्र की सतह के काफी करीब चलता है, जिससे तटीय निगरानी प्रणाली और सामान्य रडार इसे आसानी से ट्रैक नहीं कर पाते. कम ऊंचाई और छोटे आकार का फायदा इसे समुद्री अभियानों में मिलता है. सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्लेटफॉर्म भविष्य में बड़े युद्धपोतों और संवेदनशील नौसैनिक ठिकानों के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं.
इस समुद्री ड्रोन में उन्नत नेविगेशन सिस्टम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. दावा है कि इसमें एंटी-जैमिंग क्षमता भी मौजूद है, जिससे यदि दुश्मन इसके संचार या जीपीएस सिग्नल को बाधित करने की कोशिश करे, तब भी यह वैकल्पिक तकनीक की मदद से अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है. यही कारण है कि इसे इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के माहौल में भी प्रभावी हथियार माना जा रहा है.
अब तक समुद्री हमलों के लिए बड़े युद्धपोत, लड़ाकू विमान या महंगी मिसाइलों पर निर्भरता रहती थी. इन अभियानों में भारी खर्च के साथ-साथ सैनिकों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती होती थी. लेकिन इस तरह के मानवरहित ड्रोन अपेक्षाकृत कम लागत में मिशन पूरा करने की क्षमता रखते हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, ऐसे ड्रोन की अनुमानित लागत पारंपरिक हथियारों की तुलना में काफी कम होती है, जबकि इनका इस्तेमाल दुश्मन के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है.