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नई दिल्ली: दुनियाभर में चीन के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देने के लिए अमेरिका एक बार फिर अपनी रणनीति को तेज करता नजर आ रहा है. ट्रंप प्रशासन कई ऐसी अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में भारी निवेश करने की तैयारी कर रहा है, जिनका उद्देश्य चीन के आर्थिक और रणनीतिक विस्तार को सीमित करना है. बताया जा रहा है कि पिछले साल बजट और कर्मचारियों में कटौती के कारण जिन योजनाओं को रोक दिया गया था, अब उन्हें दोबारा शुरू किया जाएगा.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में कांग्रेस को जानकारी दी है कि वह 175.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत से कैरेबियाई और मध्य अमेरिकी देशों में समुद्र के भीतर बिछी पुरानी दूरसंचार केबलों को बदलने की योजना पर काम कर रहा है. इन अंडरसी केबलों को आधुनिक बनाने का उद्देश्य इस क्षेत्र में संचार व्यवस्था को मजबूत करना और चीन के संभावित तकनीकी प्रभाव को सीमित करना है. अमेरिका का मानना है कि यदि इस बुनियादी ढांचे को समय रहते अपग्रेड नहीं किया गया तो चीन इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी और मजबूत कर सकता है.
वॉशिंगटन लंबे समय से पश्चिमी गोलार्ध में चीन की बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक मौजूदगी को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है. खास तौर पर पनामा नहर के दोनों सिरों पर स्थित बंदरगाहों में चीनी कंपनियों की भागीदारी, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत चल रही परियोजनाएं और दूरसंचार क्षेत्र में चीन के बढ़ते निवेश को अमेरिका अपनी सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चुनौती मानता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के जरिए चीन केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक प्रभाव भी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जिसे संतुलित करना अमेरिका की प्राथमिकताओं में शामिल है.
अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर कहा कि चीन की आर्थिक परियोजनाएं पहली नजर में सस्ती और आकर्षक दिखाई देती हैं, लेकिन बाद में उनकी वास्तविक लागत बढ़ जाती है. उन्होंने दावा किया कि कई परियोजनाओं में रखरखाव का खर्च अधिक होता है और उनका प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहता. अधिकारी के अनुसार, ऐसी स्थितियां अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा तथा आर्थिक हितों के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं.
सूत्रों के मुताबिक, समुद्र के भीतर बिछी दूरसंचार केबलों को बदलने की यह योजना किसी एक परियोजना तक सीमित नहीं है. यह चीन के प्रभाव को कम करने के लिए तैयार की गई व्यापक अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है. आने वाले समय में इसी तरह की कई अन्य परियोजनाओं पर भी सैकड़ों मिलियन डॉलर खर्च किए जा सकते हैं, जिससे अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ तकनीकी और रणनीतिक संबंध मजबूत करना चाहता है.
दिलचस्प बात यह है कि यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग सार्वजनिक मंचों पर सहयोग और बेहतर संबंधों की बात कर रहे हैं. शी चिनपिंग के इस साल सर्दियों में अमेरिका दौरे की भी चर्चा है. इसके बावजूद अमेरिका वैश्विक स्तर पर चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए अपनी आर्थिक और रणनीतिक योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा है.