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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर बेहद सकारात्मक संकेत दिए हैं. एबीसी न्यूज से विशेष बातचीत में ट्रंप ने दावा किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत अत्यंत तीव्र गति से आगे बढ़ रही है और पूरी संभावना है कि अगले सप्ताह तक इस ऐतिहासिक समझौते पर अंतिम मुहर लग जाएगी. ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इस समझौते के तुरंत बाद रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को व्यापार के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा.
सैन्य विजय से भी बड़ा होगा यह समझौता
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कूटनीतिक प्रयास को बेहद अहम बताते हुए कहा कि ईरान के साथ होने वाली यह डील किसी भी बड़ी सैन्य जीत से कहीं अधिक बेहतर और प्रभावी साबित होगी. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनका प्रशासन एक बड़े वैश्विक और क्षेत्रीय हित को ध्यान में रखकर काम कर रहा है इसलिए फैसलों और प्रयासों का पैमाना भी उसी स्तर का होना चाहिए. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भी विश्वास जताते हुए कहा कि अंत में सब कुछ ठीक हो जाएगा.
लेबनान संकट बना बड़ी बाधा
बातचीत के बीच सबसे बड़ी अड़चन लेबनान पर इजरायली हमले और वहां सैन्य अभियान का विस्तार है जिससे ईरान बेहद नाराज है. ईरानी नेतृत्व का मानना है कि अमेरिका-ईरान संघर्षविराम में लेबनान का मोर्चा भी शामिल होना चाहिए. इस गतिरोध को तोड़ने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने खुद कमान संभाली.
ट्रंप ने की नेतन्याहू से बात
ट्रंप ने बताया कि उन्होंने हिज्बुल्लाह के उच्च प्रतिनिधियों और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से सीधे बात की है. ट्रंप के अनुसार उन्होंने दोनों पक्षों को तुरंत गोलीबारी और बमबारी रोकने को कहा है. जिसके बाद बेरूत पर संभावित बड़े हमलों को टालने और संघर्ष को थामने पर सहमति बनी है.
युद्धविराम बहाल करने की कूटनीतिक कवायद
पिछले 48 घंटों में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और इजरायली पीएम नेतन्याहू से अलग-अलग बातचीत कर संघर्षविराम को मजबूत करने की कोशिश की है. प्रस्तावित योजना के तहत हिज्बुल्लाह को इजरायल पर रॉकेट और ड्रोन हमले पूरी तरह बंद करने होंगे.
जबकि इजरायल लेबनान में आगे सैन्य विस्तार से बचेगा. जमीनी स्तर पर छिटपुट जवाबी हमलों से यह कूटनीतिक शांति बार-बार परखी जा रही है. लेकिन ट्रंप प्रशासन को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में इस क्षेत्रीय विवाद का स्थायी समाधान निकाल लिया जाएगा.