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अक्टूबर FATF बैठक में भारत का बड़ा दांव, पाकिस्तान को फिर ग्रे लिस्ट में लाने की कोशिश

आगामी अक्टूबर महीने में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की पूर्ण बैठक में भारत, पाकिस्तान को दोबारा 'ग्रे लिस्ट' में धकेलने के लिए पूरी तरह तैयार है. नई दिल्ली इस वैश्विक मंच पर ऐसे पुख्ता डिजिटल साक्ष्य और वीडियो सबूत पेश करने जा रही है.

Calendar Last Updated : 30 June 2026, 11:30 AM IST
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नई दिल्ली: आतंकवाद को संरक्षण देने और अपनी जमीन पर पनप रहे आतंकी संगठनों पर आंखें मूंदने वाले पाकिस्तान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ने वाली हैं. आगामी अक्टूबर महीने में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की पूर्ण बैठक में भारत, पाकिस्तान को दोबारा 'ग्रे लिस्ट' में धकेलने के लिए पूरी तरह तैयार है. नई दिल्ली इस वैश्विक मंच पर ऐसे पुख्ता डिजिटल साक्ष्य और वीडियो सबूत पेश करने जा रही है, जो इस्लामाबाद के दावों की पोल खोलकर रख देंगे.

ऑपरेशन सिंदूर' के वीडियो खोलेंगे पोल

भारत के पास इस बार पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेनकाब करने के लिए बहुत सारे सबूत हैं. भारतीय सुरक्षा बलों ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था, जिसमें कई आतंकियों को मारा गया था. इन आतंकियों के अंतिम संस्कार में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी ISI के कई बड़े अधिकारियों ने हिस्सा लिया था. सोशल मीडिया और खुफिया जानकारी से मिले इन वीडियो को भारत FATF की बैठक में मुख्य मुद्दे के रूप में उठाएगा. ये सबूत दिखाते हैं कि पाकिस्तान की सरकारी मशीनरी आज भी आतंकवादी संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही है.

कूटनीतिक स्तर पर भारत का सख्त रुख

FATF की इस बैठक में, जो पेरिस में आयोजित हो रही है, भारत बहुत सख्त रुख अपनाएगा. हाल ही में, भारत के संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल को FATF का उपाध्यक्ष बनाया गया है, जिससे भारत की स्थिति और मजबूत हुई है. नई दिल्ली का मुख्य उद्देश्य वैश्विक दबाव डालकर पाकिस्तान को उसके वित्तीय सिस्टम के दुरुपयोग और आतंकवादी संगठनों को मिलने वाली फंडिंग के लिए जवाबदेह बनाना है.

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ेगा

ध्यान देने योग्य बात यह है कि अक्टूबर 2022 में, पाकिस्तान को 34 बिंदुओं का एक्शन प्लान पूरा करने के दावे के बाद 'ग्रे लिस्ट' से निकाल दिया गया था. उस समय, इस्लामाबाद ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद को वित्तपोषण रोकने के लिए बड़े दावे किए थे. लेकिन जमीन पर स्थिति इसके विपरीत है। अगर भारत के नए सबूतों के आधार पर FATF पाकिस्तान को फिर से 'ग्रे लिस्ट' में डालता है, तो उसकी आर्थिक स्थिति और खराब हो जाएगी. 'ग्रे लिस्ट' में शामिल देशों को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और अन्य वैश्विक वित्तीय संस्थानों से ऋण या वित्तीय सहायता प्राप्त करने में बहुत कठिनाई होती है, जो पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था वाले पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका होगा.

शांतिदूत की भूमिका

हाल के दिनों में, इस्लामाबाद ने खुद को वैश्विक स्तर पर 'शांतिदूत' के रूप में पेश करने की कोशिश की है और अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के साथ भी संबंध मजबूत करने की कोशिश की है. लेकिन आतंकवाद को बढ़ावा देने का उसका पुराना इतिहास और भारत द्वारा प्रस्तुत किए गए नए सबूत उसके इस प्रयास को विफल करने के लिए पर्याप्त हैं. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अक्टूबर की इस बैठक में भारत की आक्रामक कूटनीति के सामने पाकिस्तान खुद को कैसे बचाता है.

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