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क्यों अटका ईरान-अमेरिका शांति समझौता? कतर में फ्रीज 12 अरब डॉलर और ट्रंप की नई शर्तों ने बढ़ाया तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते पर अभी भी तनाव बना हुआ है, क्योंकि कई अहम मुद्दों पर दोनों पक्ष सहमति तक नहीं पहुंच पाए हैं.

Calendar Last Updated : 01 June 2026, 10:35 AM IST
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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को समाप्त करने के लिए होने वाला शांति समझौता फिलहाल अधर में लटक गया है. दोनों देशों के बीच परमाणु प्रतिबंधों में ढील और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर गहरे मतभेद बने हुए हैं.

कई चुनौतियां

इन तमाम अड़चनों के बावजूद दोनों पक्षों ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच अप्रत्यक्ष संवाद का सिलसिला अभी भी जारी है. हालांकि अंतिम सहमति पर पहुंचने में कई चुनौतियां आड़े आ रही हैं.

विदेश मंत्री अराघची ने क्या कहा

ईरानी सरकारी मीडिया से बात करते हुए विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान लगातार हो रहा है. इसके साथ ही उन्होंने फिलहाल किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने को लेकर जल्दबाजी न करने की चेतावनी दी. अराघची ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक वार्ता के परिणामों को लेकर मीडिया में चल रही खबरें महज अटकलें हैं.

परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंध

इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ ईरान का परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक शर्तें हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से मांग की है कि अमेरिका ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार पर नियंत्रण चाहता है और इस सामग्री को नष्ट किया जाना चाहिए. दूसरी तरफ ईरान का रुख साफ है कि वह अपने परमाणु बुनियादी ढांचे के विवरण को इस मौजूदा बातचीत का हिस्सा नहीं बनाएगा. साथ ही तेहरान ने इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी समझौते में आर्थिक प्रतिबंधों से राहत और ठोस वित्तीय गारंटी शामिल होनी चाहिए.

ट्रंप की नई मांगों से बढ़ी अनिश्चितता

इस शांति वार्ता में ताजा अनिश्चितता वाशिंगटन में आए नए राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद पैदा हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिन्होंने हाल ही में इस समझौते के लगभग पूरा होने का संकेत दिया था. उन्होंने अब अंतिम मंजूरी देने से पहले इस ड्राफ्ट प्रस्ताव में कुछ महत्वपूर्ण बदलावों की मांग की है. ट्रंप के इस रुख के कारण बातचीत का दौर लंबा खिंच गया है. जिससे क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयासों को झटका लगा है.

हॉर्मुज खोलने की गारंटी

सूत्रों के मुताबिक ट्रंप ईरान के परमाणु वादों को और कड़ा करने के साथ-साथ वैश्विक शिपिंग के लिए मुख्य मार्ग 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' को दोबारा पूरी तरह खोलने की गारंटी चाहते हैं. इसके अलावा ट्रंप ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि इस समझौते के बाद ईरान को मिलने वाले आर्थिक लाभों का दायरा क्या होगा. हाल ही में व्हाइट हाउस में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद भी इस समझौते पर कोई अंतिम मुहर नहीं लग सकी. जबकि एक हफ्ते पहले तक इसे अंतिम रूप दिया जा चुका माना जा रहा था.

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