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नई दिल्ली: ईरान की राजनीति में इस समय एक अभूतपूर्व कूटनीतिक और पारिवारिक संकट देखने को मिल रहा है. हाल ही में एक बड़े हमले में मारे गए पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के बेटे और वर्तमान सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सकेंगे. 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की शीर्ष सुरक्षा एजेंसियों ने मोजतबा खामेनेई की उस मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने पिता के जनाजे में शामिल होने की अनुमति मांगी थी.
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सुरक्षा अधिकारियों को डर है कि यदि मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं, तो इजरायल उनकी हत्या कर सकता है. इसके अलावा, सुरक्षा एजेंसियों को यह भी आशंका है कि इजरायली खुफिया तंत्र उनके सार्वजनिक रूप से प्रकट होने का फायदा उठाकर उनके बेहद गोपनीय छिपने के ठिकाने का पता लगा सकता है. मोजतबा ने आगामी 9 जुलाई को मशहद में होने वाले अंतिम संस्कार और पारंपरिक रस्मों के लिए सुरक्षा प्रहरियों से अनुमति मांगी थी, जिसे सुरक्षा जोखिमों के चलते नामंजूर कर दिया गया है.
ईरान की सत्ता में हमेशा परदे के पीछे से धाक जमाने वाले मोजतबा खामेनेई गत 28 फरवरी के बाद से जनता के बीच नजर नहीं आए हैं. दरअसल, इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के एक भीषण संयुक्त हमले में पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत कई शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेता मारे गए थे. इस हमले में मोजतबा की पत्नी और बेटे की भी जान चली गई थी, जबकि मोजतबा खुद गंभीर रूप से घायल हो गए थे. अटकलें हैं कि इस हमले में उनका चेहरा गंभीर रूप से विकृत हो गया है. हाल ही में तेहरान में अपनी पत्नी की शोक सभा से भी उनकी अनुपस्थिति ने उनके वर्तमान ठिकाने और स्वास्थ्य को लेकर रहस्य और गहरा कर दिया है.
सर्वोच्च नेता की रहस्यमयी अनुपस्थिति के बीच ईरान के राजनीतिक गलियारों में वर्चस्व की जंग छिड़ गई है. मोजतबा फिलहाल केवल लिखित संदेशों के जरिए देश का कामकाज संभाल रहे हैं. उन्होंने अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत को हरी झंडी दी है, जिसका ईरान का कट्टरपंथी धड़ा पुरजोर विरोध कर रहा है. कट्टरपंथियों की मांग है कि जब तक मोजतबा खुद कोई ऑडियो या वीडियो संदेश जारी नहीं करते, तब तक अमेरिका से कोई बातचीत न हो.
दूसरी तरफ, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ की अगुवाई वाला नरमपंथी खेमा चरमराई अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए अमेरिका से बातचीत के पक्ष में है. ऐसे में ईरान के ये दोनों गुट दिवंगत खामेनेई की विरासत पर अपना दावा ठोकने के लिए एक भीषण आंतरिक संघर्ष में उलझ गए हैं. अब देखना यह होगा कि अंतिम संस्कार के बाद होने वाली वरिष्ठ नियुक्तियों में किस धड़े का पलड़ा भारी रहता है.