नई दिल्ली: भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक ऐसा धमाका हुआ है जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा बदल दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय संघ के नेताओं ने मंगलवार को उस समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसे सभी समझौतों की जननी कहा जा रहा है. यह न केवल भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के खिलाफ एक मजबूत आर्थिक ढाल भी है.
यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) कोई मामूली डील नहीं है। इसके आंकड़े किसी को भी हैरान कर सकते हैं. यह समझौता दुनिया की 25% जीडीपी और करीब 2 अरब उपभोक्ताओं के बाजार को एक साथ जोड़ता है. भारत में आने वाले EU के 97% सामानों और EU जाने वाले 99.5% भारतीय सामानों पर टैरिफ या तो खत्म हो जाएगा या बहुत कम हो जाएगा.
इस डील से अमेरिका परेशान है। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने फिर से रूस-भारत तेल व्यापार का मुद्दा उठाकर दबाव बनाने की कोशिश की है, लेकिन भारत-EU की इस दोस्ती ने वॉशिंगटन को साफ संदेश दे दिया है.
अगर आप विदेशी कारों या वाइन के शौकीन हैं, तो यह डील आपके लिए खुशखबरी लाई है. यूरोपीय कारें पर अभी 110% तक ड्यूटी लगती है, वह धीरे-धीरे घटकर मात्र 10% रह जाएगी. वाइन पर शुल्क 150% से घटकर 20% पर आ जाएगा. पास्ता और चॉकलेट जैसे फूड आइटम्स पर लगने वाला 50% टैक्स पूरी तरह खत्म हो जाएगा. यूरोपीय ब्रांड्स की लक्जरी आइटम्स और मशीनरी भारत में काफी कम कीमत पर उपलब्ध होंगे.
इस समझौते से भारत के उन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा जहां सबसे ज्यादा रोजगार मिलता है. बांग्लादेश जैसे देशों से मिल रही चुनौती खत्म होगी क्योंकि अब भारतीय कपड़े और जूते बिना किसी टैक्स के यूरोप के बाजारों में बिकेंगे. इन पर लगने वाला 4% से 26% तक का भारी टैक्स अब शून्य हो जाएगा. भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के लिए पूरे यूरोप के दरवाजे खुल जाएंगे. यह समझौता 2027 की शुरुआत से पूरी तरह प्रभावी होगा.