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Courtesy: X @Team_Musadik
नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है. पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी ने सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर दावा करने की कोशिश की, तो "उन हाथों को काट देंगे." उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला किया है.
इस्लामाबाद में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुसादिक मलिक ने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने जल अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा और यदि उसके हिस्से के पानी में दखल दिया गया तो इसका गंभीर जवाब दिया जाएगा.
सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने भी कहा कि सिंधु जल संधि आज भी पूरी तरह लागू है और इसे कोई भी देश एकतरफा तरीके से निलंबित या समाप्त नहीं कर सकता. उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर पाकिस्तान के पक्ष को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिल रहा है.
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि के तहत भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का अधिकार मिला था, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकांश जल पाकिस्तान के हिस्से में जाता है. यह समझौता कई युद्धों और तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद अब तक कायम रहा है.भारतीय यात्रा गाइड
हालांकि, अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को स्थगित करने का फैसला किया. भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को विश्वसनीय तरीके से रोकने के ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक इस संधि पर आगे बढ़ना संभव नहीं है.
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट किया है कि 1960 में बनी यह संधि मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप नहीं रह गई है. भारत का कहना है कि जो देश आतंकवाद को बढ़ावा देता है, वह सहयोग और विश्वास पर आधारित समझौतों के विशेष अधिकारों की उम्मीद नहीं कर सकता.
इस बीच पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की है. दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर बढ़ती बयानबाजी से साफ है कि आने वाले समय में जल विवाद और अधिक गंभीर रूप ले सकता है.