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नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव को लेकर बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और युद्धविराम समझौता 'काफी हद तक बातचीत के जरिए' संभव हो पाया है.
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर जारी बयान में ट्रंप ने कहा कि अब वार्ता का फोकस शांति स्थापित करने के लिए तैयार किए गए समझौता ज्ञापन के अंतिम बिंदुओं पर है. उन्होंने संकेत दिया कि प्रस्तावित समझौते में रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना भी शामिल हो सकता है, जो संघर्ष के दौरान लगभग बंद होने की स्थिति में पहुंच गया था.
ट्रंप ने कहा कि यह बातचीत केवल वाशिंगटन और तेहरान के बीच नहीं हो रही, बल्कि इसमें कई क्षेत्रीय देशों की भी अहम भूमिका है. उनके अनुसार, समझौते को अंतिम रूप देने के लिए मध्य पूर्व और खाड़ी देशों के नेताओं के साथ लगातार चर्चा की जा रही है.
उन्होंने बताया कि घोषणा से पहले उन्होंने कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, पाकिस्तान, जॉर्डन, मिस्र, तुर्की और बहरीन के नेताओं और अधिकारियों से बातचीत की. इसके अलावा इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी अलग से चर्चा की गई.
वार्ता को सकारात्मक बताते हुए ट्रंप ने कहा कि बातचीत “शांति से संबंधित समझौता ज्ञापन” पर केंद्रित रही. उन्होंने कहा कि समझौते की औपचारिक घोषणा से पहले वार्ताकार बचे हुए मुद्दों को सुलझाने में जुटे हुए हैं.
ट्रंप के हालिया बयान उनके पुराने रुख से बिल्कुल अलग माने जा रहे हैं. कुछ दिन पहले उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर बातचीत विफल होती है तो ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है. हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों ने क्षेत्र में तनाव बढ़ने से रोकने के लिए संयम बरतने की अपील की थी, जिसके बाद आगे के हमलों को रोका गया.
पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की ईरान यात्रा के बाद राजनयिक कोशिशों को और बल मिला है. पाकिस्तान की सेना ने इस यात्रा को 'अत्यंत फलदायी' बताया है.
इस्लामाबाद के मुताबिक, शांति प्रक्रिया को लेकर हुई चर्चाओं में सकारात्मक प्रगति हुई है. इसके बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्षेत्रीय शक्तियां संघर्ष बढ़ने से पहले स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश कर रही हैं.
ईरान ने भी माना है कि वार्ता आगे बढ़ रही है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने कहा कि तेहरान 14 सूत्रीय रूपरेखा पर काम कर रहा है, जो अंतिम समझौते का आधार बन सकती है.
ईरानी सरकारी टेलीविजन पर बोलते हुए बाक़ाई ने कहा कि दोनों पक्ष समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि अगले एक से दो महीनों में आगे की बातचीत जारी रह सके और व्यापक शांति समझौते तक पहुंचा जा सके.
हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका के प्रति सतर्कता बनाए रखने की बात भी कही है. उनका कहना है कि तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पिछली वार्ताओं के दौरान अमेरिका और इजरायल की ओर से सैन्य कार्रवाई की गई थी, जिसके कारण भरोसे का संकट बना हुआ है.
यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए जाने के बाद भड़का था. इसके जवाब में तेहरान ने इजरायल और अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों पर जवाबी हमले किए.
हालांकि अप्रैल की शुरुआत से सक्रिय लड़ाई काफी हद तक थम गई है, लेकिन क्षेत्र में तनाव अब भी बना हुआ है. होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण और ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी अब भी प्रमुख विवाद के मुद्दे बने हुए हैं.
इसके अलावा ईरान के परमाणु कार्यक्रम का भविष्य, क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी, होर्मुज जलडमरूमध्य में तेहरान की भूमिका और जमे हुए ईरानी फंड तक पहुंच जैसे मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं.