देर से जागती है दिल्ली, मुंबई में नींद की बुरी हालत; इस सर्वे में खुला बड़े शहरों की नींद का सच

पर्याप्त नींद न केवल आपके शरीर को आराम देती है, बल्कि दिमाग की कार्यक्षमता, भावनात्मक स्थिरता और स्वास्थ्य को भी बनाए रखती है. इसके बावजूद शहरी भारत में नींद की कमी एक गंभीर समस्या बनकर उभर रही है.

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Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में नींद सबसे ज्यादा नजरअंदाज की जाने वाली जरूरत बनती जा रही है, जबकि यही हमारे शारीरिक और मानसिक संतुलन की नींव है. पर्याप्त नींद न केवल शरीर को आराम देती है, बल्कि दिमाग की कार्यक्षमता, भावनात्मक स्थिरता और समग्र स्वास्थ्य को भी बनाए रखती है. इसके बावजूद शहरी भारत में नींद की कमी एक गंभीर समस्या बनकर उभर रही है.

हाल ही में Wakefit.co द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में देश के बड़े शहरों में नींद के पैटर्न का विश्लेषण किया गया. इस अध्ययन में सोने-जागने का समय, अनिद्रा, दिनभर की थकान और नींद की गुणवत्ता जैसे पहलुओं के आधार पर शहरों की रैंकिंग तैयार की गई, जिससे शहरी जीवनशैली के प्रभाव साफ तौर पर सामने आए.

किस शहर की नींद है सबसे बेहतर

रिपोर्ट के अनुसार चेन्नई को सबसे अनुशासित नींद वाला शहर माना गया, जहां देर से सोने और देर से उठने की दर कम है. हालांकि, यहां भी कई लोग सुबह तरोताजा महसूस नहीं करते. हैदराबाद ने संतुलित नींद पैटर्न दिखाया, जबकि गुरुग्राम इस सूची में तीसरे स्थान पर रहा, जहां व्यस्त दिनचर्या के बावजूद लोग अपेक्षाकृत बेहतर नींद बनाए रखते हैं.

बड़े शहरों को हो रही नींद की परेशानी

नींद की परेशानी वाले शहरों में सबसे ऊपर बेंगलुरु का नाम है. बेंगलुरु में देर रात सोने और सुबह थकान की समस्या ज्यादा देखी गई है. दिल्ली में देर से उठने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है, जबकि कोलकाता को देर रात तक जागने वाला शहर बताया गया. मुंबई सबसे ज्यादा नींद की कमी से प्रभावित शहर के रूप में सामने आया है.

स्क्रीन टाइम बना बड़ी वजह

रिपोर्ट में सामने आया कि रात में मोबाइल और स्क्रीन का अधिक उपयोग नींद में बाधा डालने वाला प्रमुख कारण है. अधिकांश लोग सोने से पहले सोशल मीडिया या वेब सीरीज़ देखने में समय बिताते हैं, जिससे नींद की गुणवत्ता पर असर पड़ता है.

काम के दौरान बढ़ रही थकान

लगभग 57 प्रतिशत लोगों ने माना कि उन्हें काम के दौरान नींद आती है. खासकर दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में यह समस्या ज्यादा गंभीर है, जो काम की प्रोडक्टिविटी पर भी असर डाल रही है. 

बदलती आदतें और कम होती नींद

इस सर्वे के अनुसार केवल 12 प्रतिशत लोग ही रात 10 बजे से पहले सोते हैं, जबकि ज्यादातर लोग देर रात तक जागते हैं. कई लोग काम के दबाव के कारण कम समय में ही नींद पूरी करने की कोशिश करते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

सुधार के आसान उपाय

विशेषज्ञों का मानना है कि, नियमित समय पर सोना, स्क्रीन टाइम कम करना, जल्दी भोजन करना और शांत माहौल में सोना नींद की गुणवत्ता सुधारने में मददगार कर सकता है.

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