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रोज-रोज के इंजेक्शन से मिली मुक्ति, भारत में लॉन्च हुई हफ्ते में सिर्फ एक बार लगने वाली दुनिया की पहली इंसुलिन

भारत में डायबिटीज मरीजों के लिए दुनिया की पहली सप्ताह में एक बार लगने वाली बेसल इंसुलिन Awiqli लॉन्च की गई है, जिससे सालभर में 365 की बजाय सिर्फ 52 इंजेक्शन लेने होंगे.

Calendar Last Updated : 09 July 2026, 03:30 PM IST
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नई दिल्ली: मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर है. डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में दुनिया की पहली सप्ताह में एक बार लगने वाली बेसल इंसुलिन 'अवीक्ली (Awiqli)' लॉन्च कर दी है. यह नई इंसुलिन टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित वयस्क मरीजों के लिए है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब मरीजों को रोजाना इंजेक्शन लेने की बजाय पूरे साल में केवल 52 बार इंसुलिन लगानी होगी.

रोजाना इंजेक्शन से मिलेगी राहत

अब तक ज्यादातर डायबिटीज मरीजों को रोजाना इंसुलिन लेना पड़ता था, जिससे सालभर में करीब 365 इंजेक्शन लगाने पड़ते थे. नई साप्ताहिक इंसुलिन इस परेशानी को काफी हद तक कम कर सकती है. डॉक्टरों का मानना है कि इससे मरीजों के लिए इलाज आसान होगा और वे नियमित रूप से इंसुलिन लेना नहीं छोड़ेंगे.

कितनी है कीमत?

कंपनी ने 700 यूनिट वाले पैक की कीमत 2,611 रुपये तय की है. यानी प्रति यूनिट लागत करीब 3.73 रुपये पड़ती है. कंपनी का दावा है कि यह मौजूदा कई दैनिक बेसल इंसुलिन की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक किफायती है. यदि किसी मरीज को रोजाना 10 यूनिट इंसुलिन की जरूरत होती है, तो उसे सप्ताह में लगभग 70 यूनिट इंसुलिन की आवश्यकता होगी.

भारत में क्यों है इसकी जरूरत?

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डायबिटीज के मरीजों की संख्या सबसे अधिक है. देश में करोड़ों लोग मधुमेह से जूझ रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग प्री-डायबिटीज की स्थिति में हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि कई मरीज रोजाना इंजेक्शन लगाने के डर या असुविधा के कारण समय पर इंसुलिन शुरू नहीं करते. ऐसे में सप्ताह में केवल एक बार लगने वाली इंसुलिन इस समस्या को काफी हद तक दूर कर सकती है.

इलाज होगा आसान

नई इंसुलिन फ्लेक्सटच (FlexTouch) पेन डिवाइस के जरिए दी जाएगी, जिससे इसका इस्तेमाल आसान होगा. क्लिनिकल अध्ययन में यह भी सामने आया है कि यह इंसुलिन ब्लड शुगर नियंत्रण में दैनिक बेसल इंसुलिन जितनी या उससे बेहतर प्रभावी साबित हुई है. साथ ही इसकी सुरक्षा भी संतोषजनक पाई गई है.

ऐसा मानना है कि यह नई तकनीक भारत में डायबिटीज के इलाज का तरीका बदल सकती है. यदि अधिक मरीज समय पर इंसुलिन थेरेपी शुरू करते हैं और नियमित रूप से इलाज जारी रखते हैं, तो इससे मधुमेह से जुड़ी जटिलताओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है.

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