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महाराष्ट्र में शराब पीने से गई 18 लोगों की जान, घटना के बाद प्रशासन सख्त, 22 कर्मचारी सस्पेंड

बकरीद की रात शुरू हुई खुशियां पुणे में एक दर्दनाक हादसे में बदल गईं. जहरीली शराब पीने से अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है. वहीं लापरवाही के आरोप में कुल 22 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है.

Calendar Last Updated : 31 May 2026, 12:28 PM IST
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पुणे: महाराष्ट्र के पुणे से आई एक खबर ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है. बकरीद के मौके पर जहां लोग त्योहार की खुशियां मना रहे थे, वहीं कुछ परिवारों के घरों में अचानक मातम छा गया. जहरीली शराब पीने से अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है. इस घटना के सामने आने के बाद प्रशासन, पुलिस और राज्य सरकार हरकत में आई और बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है. घटना के बाद पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस और राज्य आबकारी विभाग ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी. 

शुरुआती जांच में सामने आया कि अवैध तरीके से तैयार और सप्लाई की जा रही शराब में जहरीला रसायन मिलाया गया था. इसी लापरवाही और अवैध कारोबार पर नियंत्रण न रख पाने के आरोप में कुल 22 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है. इतना ही नहीं, ठाणे जिले के एक गोदाम से करीब 5,929 किलोग्राम जहरीला मेथनॉल भी जब्त किया गया. बताया जा रहा है कि इसी रसायन की मदद से अवैध शराब तैयार कर पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ तक पहुंचाई जा रही थी.

मंत्री ने बताया मौतों की वजह

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश महाजन ने जानकारी दी कि शुरुआती जांच में शराब में मिथेनॉल मिलाए जाने की बात सामने आई है. यही कारण रहा कि शराब जहरीली हो गई और इतने लोगों की जान चली गई. उन्होंने बताया कि सस्ती शराब के लालच में मजदूर वर्ग के कई लोगों ने इसका सेवन किया, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ.

पीड़ित परिवारों के लिए मदद का ऐलान

राज्य सरकार ने इस घटना के बाद प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है. मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की मदद दी जाएगी. इसके अलावा नगर निगम की ओर से भी एक लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता देने की बात कही गई है. स्थानीय स्तर पर यह भी प्रयास किया जा रहा है कि जिन परिवारों ने अपने कमाने वाले सदस्य को खो दिया है, उन्हें रोजगार का सहारा मिल सके.

जांच सीआईडी को सौंपी गई

सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीआईडी को सौंप दी है. अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ शराब बनाने और बेचने वालों तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिनकी जिम्मेदारी के बावजूद यह अवैध कारोबार चलता रहा, उन पर भी सख्त कदम उठाए जाएंगे. कई पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है.

विपक्ष ने उठाए सवाल, सरकार पर बढ़ा दबाव

इस घटना को लेकर विपक्ष ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. कई नेताओं ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं तभी होती हैं जब अवैध कारोबार को समय रहते नहीं रोका जाता. कुछ नेताओं ने पुलिस व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर भी चिंता जताई और जिम्मेदार अधिकारियों पर और सख्त कार्रवाई की मांग की.

घटना के बाद पूरे इलाके में लोगों के बीच डर और गुस्सा दोनों देखने को मिल रहे हैं. सरकार ने राज्यभर में अवैध शराब के खिलाफ अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं. प्रशासन का कहना है कि किसी भी हाल में अवैध शराब के कारोबार को पनपने नहीं दिया जाएगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.

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