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असम कोयला खदान में फंसे एक श्रमिक का निकला शव, 8 मजदूरों के लिए बचाव अभियान जारी

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शव की बरामदगी की पुष्टि करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं. हालांकि अभी भी आठ श्रमिक खदान में फंसे हुए हैं. बचाव अभियान में भारतीय नौसेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और सेना शामिल हैं.

Calendar Last Updated : 08 January 2025, 11:24 AM IST
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Assam Coal Mine: असम के दीमा हसाओ जिले में एक अवैध कोयला खदान में फंसे नौ खनिकों में से एक का शव बुधवार को भारतीय सेना की गोताखोरी टीम ने बरामद किया.  21 पैरा कमांडो की गोताखोरी टीम ने 300 फुट गहरी खदान के तल से शव बरामद किया. यह हादसा भारी बारिश के कारण हुआ, जिससे खदान में पानी भर गया और श्रमिक फंस गए. जिन्हें बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है. 

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शव की बरामदगी की पुष्टि करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं. हालांकि अभी भी आठ श्रमिक खदान में फंसे हुए हैं. बचाव अभियान में भारतीय नौसेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और सेना शामिल हैं. खदान में लगभग 100 फुट तक पानी भर चुका है, जिससे बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण हो गया है.  

हो रही ये समस्याएं

बचाव कार्य में जुटी टीम का कहना है कि खदान में लगातार पानी का रिसाव हो रहा है, जिससे जल स्तर कम करना मुश्किल हो रहा है. साथ ही खदान के अंदर लगभग शून्य दृश्यता और अस्थिर संरचना ने बचाव कार्य को धीमा कर दिया है. नौसेना द्वारा पानी के नीचे कैमरे, रिमोट से संचालित वाहन (ROV) और सोनार सिस्टम का उपयोग खदान का मानचित्रण करने और फंसे हुए लोगों को ढूंढने के लिए किया जा रहा है.  मुख्यमंत्री ने बचाव अभियान को पूरा समर्थन देने का वादा किया है. खदान से पानी निकालने और बचाव कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है. 

अवैध खनन गतिविधियां ने लाई मुसीबत 

यह खदान असम-मेघालय सीमा के पास उमरंगसो में स्थित है. जिसमें अवैध खनन गतिविधियां की जा रही थी. तभी भारी बारिश ने इस त्रासदी को जन्म दिया. खदान के अंदर संकरी सुरंगें, तेज़ धाराएं और मलबा बचाव कार्य को जटिल बना रहे हैं. जल स्तर को कम करने के लिए प्रयास तेज किए जा रहे हैं. बचाव कर्मियों और फंसे हुए श्रमिकों की सुरक्षा प्राथमिकता बनी हुई है. एनडीआरएफ और नौसेना उन्नत उपकरणों और सामूहिक प्रयासों से खदान की संरचना को सुरक्षित बनाने का काम कर रहे हैं.  

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