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नाना पाटोले के बयान से बढ़ा विवाद, भाजपा बोली— यह भक्ति नहीं, चापलूसी की पराकाष्ठा पार

कांग्रेस नेता नाना पाटोले ने राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से कर दी, जिसके बाद राजनीतिक सियासत में घमासान शुरु हो गया है. उनके इस बयान की भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी निंदा की है. 

Calendar Last Updated : 01 January 2026, 03:16 PM IST
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नई दिल्ली: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अक्सर ही अपने अनोखे बयान के लिए चर्चा में बने रहते हैं . लेकिन इस बार वह खुद की नहीं बल्कि पार्टी नेता नाना पाटोले की टिप्पणी के कारण चर्चा का विषय बने हुए हैं. 

दरअलल कांग्रेस नेता नाना पाटोले ने राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से कर दी, जिसके बाद राजनीतिक सियासत में घमासान शुरु हो गया है. उनके इस बयान की भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी निंदा की है. 

नाना पाटोले का बयान कैसे बना विवाद की वजह

दरअसल, नाना पाटोले से सवाल पूछा गया था कि राहुल गांधी अब तक अयोध्या के राम मंदिर क्यों नहीं गए हैं. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि राहुल गांधी “भगवान राम जैसा काम कर रहे हैं”. 

पाटोले ने कहा कि भगवान राम का उद्देश्य समाज के कमजोर और पीड़ित लोगों को न्याय दिलाना था और राहुल गांधी  उसी रास्ते पर चल रहे हैं. उन्होंने सीधे तौर पर राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से कर दी है. जिसके बाद अब सियासत की गलियों में विवाद छिड़ा हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी को मंदिर में फोटो खिंचवाने से ज्यादा लोगों की सेवा करना पसंद है. 

भाजपा का पलटवार: हिंदू आस्था का किया अपमान

नेता नाना पाटोले के इस बयान पर भाजपा ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है. भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हिंदू आस्था का अपमान कर रही है. उन्होंने इसे चापलूसी की चरम सीमा बताया.

भाजपा का कहना है कि कांग्रेस के नेता एक तरफ राहुल गांधी को भगवान राम जैसा बताते हैं और दूसरी तरफ राम मंदिर और उसकी प्राण प्रतिष्ठा को लेकर विवादित बयान देते रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि यह किस तरह की राजनीति है.

राम मंदिर शुद्धिकरण वाले बयान पर भी जताई नाराज़गी

भाजपा प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने भी कांग्रेस और नाना पाटोले पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस बार-बार करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है. केशवन ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के राम मंदिर दर्शन के बाद नाना पाटोले ने मंदिर के शुद्धिकरण की मांग की थी, जिसे उन्होंने शर्मनाक और निंदनीय बताया.

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